गांधी जी को श्रद्धांजलि | Gandhi Ji Ko Shraddhanjali

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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२ गांधोजी को भरद्धांजलि सेवा, भंगियों की सेवा आदि अनेक सेवा-कार्य हमारे लिए वे छोड़ गये हैं । अब इस समय में अधिक कहना नहीं चाहता हूं 1 सबके दिल एक विशेष भावना से भरे हुए हैं। लेकिन मुझे कहना यह है कि केवल शोक करते न बेठ ; हमारे सामने जो काम पड़ा है उसमें लग जायं । यह जो में आ्रापको कह रहा हूँ वसा ही आप मृभे भी कहें । इस तरह एक-दूसरे को बोध देते हुए हम सब गांधीजी के बताये काम करने लग जायं | गीता में और क्रान मैं कहा है किं भक्त और सज्जन एक-दूसरे को बोध देते हैं और एक-दूसरे पर प्रेम करते है। वसा हम करें। आज तक बच्चों की तरह हम कभी-कभी भगडते भी थे। हमें वे सम्भाल लेते थे। वैसा सबको सम्भालने वाला अब नहीं रहा है । इसलिए एक-दूसरे को बोध देते हुए और एक-दूसरे पर प्रेम करते हुए हम सब मिलकर गांधोजी को सिखावन पर चलं । ३१ जनवरी ४८ | [ प्राथंना-सभा : परंधाम : २ : रै सामुदायिक पाथना मेरी भ्राज कृ श्रधिकं कहने की इच्छा नहीं है । सिफं एक बात कहना चाहता हँ । हिन्दुस्तान के ऐतिहासिक काल में जो घटना शायद कभी नहीं हुई




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