संक्षिप्त - जैन - इतिहास भाग - ३ खंड - ३ | Sanshipt Jain Itihas Bhag - 3 Khand - 3

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१४९ ११ १५० १५२ १५७ १.५९ १६२ १६९ पनः २० १० १९ २१ १ १३ ११ १३ १८ ५ २१ २२ १९ १० [ १५ ] असुद्ध अनृटी कविनासं गृक्ऽाा ग 8908743 नानक काव्यकमेज्ञो ८ ५८ १ उन्पत्ति आश्रम थी र %1 प्र 1811116 1111015 पक्षिणों शुद्ध अनूठी कविता -सी. 1098९818 ণ)313749 नामक काव्य- ममन्नो उन्नति आश्रय ध 111 [870६ ७४४2० [0111४78 पक्षियों नोर- 'मह्टिकामाद्‌ यान्तीसः का वणन १० १८२ पर ठीके दिया ह) प्रण २३ पर नहीं पटना चादिप ।




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