आनन्दमय जीवन | Anandmay Jeevan

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Anandmay Jeevan by रामचरण महेंद्र - Ramcharan Mahendra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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आनन्दमय जीवन १५ शेविंगकी (छुगमता) प्रातः चाय तथा चिष्छुटकी चिन्तमि थे तो दूसरे सिगरेट्के लिये उतावले थे। तीसरे नोकरकों पुकार-पुकारकर उनका विस्तर न उठाने ओर चेस्टर न देनेपर परेशान ये, चोथे महोदय टद्धीके स्यि पानी मोग रंहे ये, खयं नहीं लेना चाहते थे। एक महोदय बिस्तरेमे पड़ें-पड़े जाड़िकी शिकायत कर रहे थे। साराश, प्रत्येक अपने कृत्रिम जीवनकी जंजीरोमे जकड़ा पड़ा था और तनिक-सी असुविधासे छटठपणा रहा था । सुखमय जीवन मेरा था; जो नोकरके छोते हुए. भी खययं अपने पॉवो- पर खड़ा दूसरोकी सहययताको प्रस्तुत था । सादगी सबसे बढ़िया फैशन है । ऋत्रिमता और बनावट सबसे अधिक ढुःखदायक है। -“” आर्थिक समस्या आज प्रवेक व्यक्ति ओर परिवारकी सम्या है । जो. कुछ आप कमाते हैं; उससे कम व्यय कीजिये । सम्भव दे आपको : सम्भव है आपको अपनी आवश्यकताएँ कम करनेमे कठिनाइयाँ प्रतीव हों। सच मानिये; आयके अनुसार अपना बजट बनाने ओर नियन्त्रण- करनेवाला व्यक्ति ही सुखी 'रहता है। दृढ़ नियन्त्रण और संयमः है| दृढ़ नियन्त्रण ओर संयमके बलपर प्रत्येक व्यक्ति कुछ बचत अवश्य कर सकता है। आपका सुख आपकी बचतपर निर्भर है--यह मत मूलि । আইজ ই নত इतर जा मजय जोर पर बचतकी योजना घरमें अवश्य रखिये | खय॑ इसपर कार्य कीजिये ओर अपने बच्चोंकी सिखछाइये | ~ सुजनात्मकरूपसे विचार किया कीजिये। अपने-आपको ऐसी शिक्षा दीजिये कि आप स्पष्टतः ओर सचाईसे विचार कर सकं, कब्पनाके मिथ्या छोकमे न रहे | अपना मन उपयोगी योजनाओससे परिपूर्ण रखा कीजिये । अपने मस्तिष्कके द्वारपर एक जागरूक प्रहरीकी मॉति खडे रहिये कि कहीं कोई अनिष्टकरः अहितकर घातक विचार उसमें अनजानमे ग्रविष्ट न हो जाय। प्रत्येक घातक विचार आपका भयंकर श्र है | सावधान ! ८“दूसरोंके समक्ष बहस या तकमें बातचीत तथा व्यवहारमे आत्म- समर्पणकी आदत बनाइयेः ! मान लीजिये, अप किसीसे भिन्न दृष्टिकोण




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