साहित्यिकों से | Sahityikon Se
श्रेणी : साहित्य / Literature

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Add Infomation AboutAcharya Vinoba Bhave
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
35 MB
कुल पष्ठ :
555
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१२ 4 साहित्यिकों सेउसको अच्छे-साहित्य में गिनती हो सकती हू । साहित्यिकों से मेरा
प्रेम रहा हे, और उनकी मुझ पर कृपा भी रही हू । में उनकी कदरकरता हूँ । में मानता हूँ कि सामाजिक जीवन मं उनका स्थान ऊचा
हैं, इसलिए मेन साहित्यिकों को “देवर्ष” कहा हु । ऋषि तीन प्रकार
के हीते हें: ब्रह्मषि, राजषि और देव्षि। जो तत्त्व-चितन' में
मस्न रहते हैं, जीवन की गहरोई में पठते हें, उन्हें ब्रह्म कहा जाता
ह । ब्रह्य क चितन को राजर्षि व्यवहार में लाते हे, और देवषि'
उसका गायन करते हं । नारद देवषि.थे ।सहज प्रेरणा- साहित्य आत्महेतु के लिए होता हं, परमेश्वर कं लिए होता
है, ओरं अहतुक भी होता हं । ` कुल मिलाकर साहित्यिकों से
बोले बगेर, लिखे वगर रहा नहीं जाता । उन्हें सहज प्रेरणा होती है,
अन्तःस्फूति होती हं, जसे, गंगा सहज बहती हे, सूरज सहज प्रकाशं ,
देता है । सूरज को उसका भान नहीं होता ह कि में प्रकाश दे रहां |
हूँ । उसी तरह देवषि स्वाभाविकं रूप से बोलेंगे, रोयेंगे । हेतु-पूर्वक
बोलेंगे तो भी गायेंगे । साश्त्यिकों का स्थान बहुंत' ही ऊंचा हू।भगवद्गीता' का मतलब हु--भगवान् को गायी हुई चीज । इसलिए
साहित्िकों का जीवन मं विदोषस्थानहं । ` ` ` 7
अज्ञात दवषि |इस जमाने में भी ऐसे देवषि हुए हें । रंवीन्द्रनाथ ठाकुर देवर्षिथे । जो इडे होते हे, प्रसिद्ध होते हें, वे ही अच्छे गौर उत्तम साहित्यक
होत हेः एसी कौत नहीं हं । वे तो अच्छे हु ही, परन्तु उनसे भौ वदकर्
वे हो सकते हं, जिन्हें लोग जानते नहीं 1 सुरज क सगत प्रकार कौ
क्रिरे हम जतिः, परन्तु जो अल्टरावायोलेट' मौर ्रंफारेड-जेसी
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