आर्य संगीत रामायण | Arya Sangeet Ramayan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्रथम दृश्य श्र हादेव | क्‍या मेरे भाग्य में यही लिखा था कि में संसार से इस तरह निराश जआाऊँ ? शोक इच्चाकु बंश की समाप्ति के कलंक का टोका मेरे हो मनहूश्र माथे पर लमना था ? नाथ [ आपके मणडार में तो किसी चीज की कमी नहीं; परन्तु यह मेरी चशिष्ठ जी का गाना चता दो मुक्त भी ऐ राजन, तुम्हारे दिल पे मलाल क्या हैं। हुआ यह चेहरा उदास क्यों है, कहो तबियत का दाल क्या है । हुम्दारी यदद- देख कर के हालत, हुए हैं छोटे बड़े हिरासां । तुम्हारे दिल में यकायक ऐसा, बताओ आय ख्याल क्या है। अमन से बस्ती है प्रज्ञा सारी, ग़नीम का कुछ नहीं है खटका । जो आंख भर कर इधर को देखे, भला किसी की मजाल क्या है। दबा है इंश्बर की हर तरह से, मगर नहीं कुछ समझ में आता ।




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