कुमारदास कृत जानकीहरण महाकाव्य - एक समालोचनात्मक अध्ययन | Kumardas Krit Janakiharan Mahakavya- Ek Samalochanatmak Adhyayana
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
15 MB
कुल पष्ठ :
266
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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मनीबियो जले भरी उने व्वौव्टधर्मीं डी स्वीकाया डै1* अन्त
साक्ष्य भी- कुमारठास को बौद्ध धर्म सिद्ध करते हैं। फिर भीते उदार तथा सब धर्मो क्ता आदर करते द।
समय लिर्धाखणः-सखंस्क्त के अन्य कवियो की डी भा ति कुमारदास
का समय निर्धरण भी विभिल्ल मतभेदो ज व्खिर्णं ड,
विद्धालों नें कोड मतैक्य लीं डे! महाकवि कुमारदास के
समय के सम्बन्ध मे विविध विह्लानों के मत निम्नलिखित
डडा० क्रीथ का कथन है कि महयकवि क्टुमारटास
काणिकावृत्ति (लगभग &७०ई०) से चर्वित यै जबकि दुसरी
ओर तवामल (लगभग ৫০০০) उन्हें अवश्य जानते रहे डोगे
जिन्होजे कुमारदास की कविता मे प्राप्तढ्लाल वाले खलु' के
यदादि में प्रयोग की निन््दा की है।*कीथश महोदय के इस मत के सम्बन्ध मे यदा४ उद्धत जाजकीडरण की भ्रुमिका 2০ ৩ व्याख्यावजर एव सम्पादक आचार्य
भालचन्द्र पाण्डेय 1
ও क्ञट्यालकार सुनवृत्ति, 9/१/७
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