भगवान् पश्र्वनाथ की परंपरा का इतिहस | Parshwanath Ki Parmpara Ka Itihash Poorvardh Vol-1

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पग तूः पशमन यः की प्रस्णरा के फस णए के एच्छु-जर््ए*न निम्नेन्थगच्छविद्याधरगच्छ (आचाय स्वयंप्रभसूरि से)| | उपकेशगच्छ कोरंटगच्छ (সা कव से ) ( आचाये न से) मूलगच्छ ® कुकृदी शाखा मूलगच्छ माथुरी शाखा_- _ | _ (कुकुंदाचाय से )मूलगच्छं द्विवन्दनीक शाखा_। मूल शाखा ( बद्ध ) लघु कुकुंदी शाखा + © -- -------- ( कुकंंदाचार्य-कफसूरि ) | मृल भीन्नमाल शाखा चन्द्रावती शाखा नु | নক मेड़ता की शाखा मूल शाखा खटकू'प शाखा | ( सिद्धसूरि से ) | | নি मृल खटकू प शाखा लघु खटकू प शाखा ( वृद्ध )भक4 ~ |पीकानेर शाखा खजवाना शाखा० म ৩০ ২১১০০ ০৮০৩৩ ৬১০০৬ ০০৯৯৯& ग्द चों ५ न, शु श्रररि : अपर वतलाई उपकेशगच्छ की सब शाखाओं में--आचार्यों की नामावली क्रमशः ककसरि देवगुप्रस। ओर सिद्धसूरि नाम से ही चल्ली आई हैं अतः निणय करने में वड़ी सावधानी रखनी चादिये ।




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