भजन - संग्रह भाग 5 | Bhajan Sangarah Part-5

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : भजन - संग्रह भाग 5 - Bhajan Sangarah Part-5

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about घनश्यामदास जालान - Ghanshyamdas Jalan

Add Infomation AboutGhanshyamdas Jalan

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
प्रार्थना डे प्राथना ले धदजनटूड ध्ल््ट्प कल (४ ) राग आसावरी परम गुरु राम-मिलावनहार ) अति उदार, मज्जुल मज़लमय;अभिमत-फल-दातार || टूटी फूटी नाव पड़ी मम भीषण मव-नद घार । जयति जयति जय देव दयानिधि; बेस उतारों पार ॥ (५ ) राग देवी खमाच आयो चरन तकि ।सरन तिहारी । बेगि करों मोहि अभय; बिहारी ! जानि अनेक फिरयों भटकान्यो | अब प्रमु-पद छाड़ों न सुरारी ! ॥ मो सम दीन; न दाता तुम सम | भली मिली यह जोरि हमारी ॥ में हों पतित; पतितपावन तुम । पावन करु; निज बिरद सेभारी ॥|




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now