भजन - संग्रह भाग 5 | Bhajan Sangarah Part-5

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2.01 MB
कुल पष्ठ :
168
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)प्रार्थना डेप्राथना
ले धदजनटूड ध्ल््ट्प कल(४ ) राग आसावरी
परम गुरु राम-मिलावनहार )
अति उदार, मज्जुल मज़लमय;अभिमत-फल-दातार ||
टूटी फूटी नाव पड़ी मम भीषण मव-नद घार ।
जयति जयति जय देव दयानिधि; बेस उतारों पार ॥
(५ ) राग देवी खमाच
आयो चरन तकि ।सरन तिहारी ।
बेगि करों मोहि अभय; बिहारी !
जानि अनेक फिरयों भटकान्यो |
अब प्रमु-पद छाड़ों न सुरारी ! ॥
मो सम दीन; न दाता तुम सम |
भली मिली यह जोरि हमारी ॥
में हों पतित; पतितपावन तुम ।
पावन करु; निज बिरद सेभारी ॥|
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