खोटा बेटा | Khota Beta

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
246
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand) ~--~~-~-~------------~------~--~------------------------------------------~-----~-~- ~~~ ~~शुरू कर दिया ।कुमार क द्व हो पड़ा और बोला--यह क्या ? इसे कहाँ लिये जाते
हो ! मैंने इसे गोली से मारा है ।”कुमार का चेहरा लाल हो उठा | वह अपना शिकार दूसरे को देते
को तैयार नहीं था ।उनमें से एक ते दबी जबान से कहा-- “यह अच्छी रही | दो घणटे
से हम इसके पीछे दौड़ रहे ह ग्नौर भ्रब यह इनका हो गया ) सरकार |
गोली से सुश्रर नहीं मारा जाता १कमार का चेहरा तमतमा उठा । उन्होने तलवार की मूठ पर हाथ
रख कर कहा-~ देख वे ! संभाल कर बातकर, नहींतो सुश्रर की
लाड पर तेरी भी लाह गिरेगी ।?शेरसिह ने मुसकरा कर कहा--बेठा यह तुम्हारे किस काम का।
ये विचारे इसके लिये तंग हुये । इन्होंने इसे जरूमो भी खूब कर डाला
था इसलिये यह इन्हीं का क्षिकार हैं। इन्हें ले जाने दो । इन बेचारों
का भोजन चलेगा ।”कुमार ने कहा--कदापि नहीं ! मेने इसे मारा प्रतएव मेरी चीज
है। मुझे अपनी चीज पर अधिकार है। में यह कभी स्वीकार नही कर
सकता | माँग कर भले ही ले. जाँय पर श्रधिकार जमा कर नही ले जा
सकते ।”शेरसिंह के माथे पर बल पड़ गये । उसका चेहरा तमतमा झठा।
आंखें लाल हो गई' । उसने कुछ ककेश स्वर में कहा--बार बार बया
कहते हो कि मेरी चीज है, मेरा भ्रधिकार है।? दूसरे के जख्मी किये हुये
सुअर पर इतना अ्रधिकार ! बड़े दारम की बात है । जिस पर तुम्हारा
ग्रधिकार है, जो तुम्हारी चीज है, जिसे दूसरे हड़प किये बेठे हैं, उसकी
तुम्हें खबर एक नहीं।?” । |एक साँस ही में शेरसिह ने यह सब कह डाला और जब उसने
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