चरचा - शतक सुगम हिंदीटीका सहित | Charcha - Shatak Sugam Hindi Tika Sahit

Charcha - Shatak Sugam Hindi Tika Sahit by नाथूराम प्रेमी - Nathuram Premi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मूठ, पंक्ति. छ द्पै ०९ ११२ कै११ १२१ है है १२५ १९५ १९९ १३९३ न न रण युद्ध, युद्ध, ( अहावका वावठेपनका ) .... ( वावढेपनका इनमेंसे अनादि मिथ्यादधी जीवके इनमेंसि सम्पग्मिस्याल सम्यग्मिथ्यात्व उ्प्यपर्याप्क इतर निगोद जीवोंके लब्प्यपर्याप्तक जौोंके बारहवें शुणस्थान तेरहवें गुणस्थान ५. आठ अदेश हैं । उनसे साठ प्रदेश हैं। उन ाठ पद प्रदेशोंको अपने शरी रके आठ मध्य प्रदेश बनाकर जघन्य भव गाइनाकों घारण करके उतन्त हो तथा उसी भवगाहनाकों. छेकर जितने उसके आतम+ श्रदेश हैं उतनी ही वार जन्म मरण करे । इसके वाद उनसे गुणस्थानमें शुणस्थानसे तो उस समय मरणते पदले ही. तो चोधे गुणस्थानमें भाता छपरसे गिरकर एक धार तो... दे अयांत मरणसमद चौथे गुणस्थानमें आता दै ! सर्याद्‌ अन्समय थीर फिर देवगतिंको आर देवगतिकों ६. कार्माण थोगकी व्युच्छित्तिं ... कामांगयोग होती है होते हैं। स्वाधितिथि सर्वार्थतिद्धि चौदद गुणस्थानोंमें चौतीस भाव। चौदह गुण्थानोंगें चौतीस मावोंकी ब्युच्छिति ।




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