हिन्दू कौन है | Hindu Kaun Hai

Hindu Kaun Hai by ओमप्रकाश अग्रवाल - OmPrakash Agarwal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मे ये न केवल शापस में ही सिन्ध कहलाते थे बरन्‌ हमारे पास इसके भी निश्चित प्रमाण हैं कि अपने निकटस्थ रप्टों में कम से कम एक में तो अवश्य ही उसी नाम सप्रसिन्ध से पृ्ठारे जाते थे । किसी समय संस्कृत का स / ५ सब्दाश भारतीय और अभारतीय दोनों प्राकृत भाषाशओं के ह में परिवर्तित होजाता था । उदाहरण के लिए सप्त शब्द हम होगया है | न केवल भारतीय प्राकृत भाषाध्ों में ही वरन्‌ योरूप की भापषाष्यों में भी हमारी भाषा में हा है एक सप्ताह श्बौर देप्टार्की सिनवणकए योरूप में । संस्कृत का केसरी प्राचीन हिन्दी में केहरी होजाता है। सरस्वती फारसी भाषा में हरहवती श्रौर सुर हर होजाता है। और तब हमें ठीक पता चलता है कि हमारे राष्ट का चेदिक नाम सप्तसिन्ध अवस्ता भाषा में प्राचीन पारसियों द्वारा हप्नहिन्दू लिखा गया है | अतरव इतिहास. के श्रारम्भ में हो हम अपने शाप को सिन्ध्ों था हिन्दुओं के राष्ट्र से सम्बन्धित पाते हू । यह तत्व हमारे विद्व्ननों को. पौराणिक काल में भी भली प्रकार शात था | म्सेच्छ भाषाश्ों में से बहुत सी केवल संस्कृत भाषा कीं शाखा मात्र ही थीं इस सिद्धान्त की. व्याख्या करके भविष्य प्राण इस तथ्य . को स्पष्टतया बतलाता है-- संस्कृतस्वैव वाणी त भारतंवषेमुतामू । _ अस्येखण्डेगता सेव म्लेच्छाह्यानंदि नोड भवन | पिल पैतर _ आताच बादर स्पतिरेवच । सेति सा यावनी भाषा हाश्वश्चास्यस्तथा .. पुनः ॥ जानुस्थाने जैनशब्द सप्तसिन्धुस्तथैव च । हप्हिस्दुर्याबनी . चे पुनणद्ेया गुरुडिका ॥। प्रतिसग पते श्र० 2 अतएव निश्चित.




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