बागवान | Bagwan

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Bagwan by पं गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी - Pt. Giridhar Sharma Chaturvedi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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৮ * ‡ एक एक व्यक्ति का हू है. तो समवय साथी परवा है भला क्‍या जो होते मेरे श्वत वाल ? ~क द ३ प्रातःकाल मैने डली समुद्र के बीच जाल खींचलीं तमिस्नपूर्ण अत्यन्त गहराई से विचित्र आङति वानी अद्भुव-सुंदर बस्तु:-- दमकती जिनमें थीं कुछ मन्द-स्मित सम, रम्य दीति दिखाती थी अश्ुकरः की-सी कुछ, ओर कुछ শুভ! লিষি सलक रषी यीं ऐसी नवल यघ्ूके देवे जसे सनक कपाल ४ घर को गया में जब दिवसतः क वोर [ভিউ




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