जुर्म और सज़ा | Jurm Aur Saza

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Book Image : जुर्म और सज़ा - Jurm Aur Saza

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विजय चौहान - Vijay Chauhan

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शिवदान सिंह चौहान - Shivdan Singh Chauhan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१० जुर्म और सजा उसे परिचित एक दिखायी दिये । लेकिन किसी ने उसके इस उनन्‍्माद की ओर शयान नही दिया); उसका साथी क्रंद्ध भाव से यह सब हरकते देख रहा था । कमरे मे एक और आदमी भी था जो शक्ल-सूरत से एकं रिटायडं क्लके मानूम होता था । वह बीयर की चुस्कियाँ लेते हुए सबकी ओर देखता जाता था । वह भी किसी कारण से उद्विग्त था ।




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