तीन पीढ़ी | Teen Peedhi

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मक्सिम गोर्की - maxim gorki

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विजय चौहान - Vijay Chauhan

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शिवदान सिंह चौहान - Shivdan Singh Chauhan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(७) लड़के और छड़की ने एक दूसरे से आँखे चुरातें हुए हाथ मिला लिए. और अपने घुटनों के बल नीचे झुक गए. । उन्होंने आपने सर भुका दिए. और सॉस लेने के लिए छुट्पटाते हुए बैमाकोव ने उनके सर पर अपने घराने के मोतिया जड प्राचीन धर्म-चिह् को उठाकर थाम लिया । पिता और पुत्र के नाम पर ...या भगवान्‌ मेरी एकलौती बच्ची को अनाथ न छोड़ना | ? अअर्नासोनोव से उसने कठोर मुद्रा में कहा-- याद रखो मेरी बेटी के लिए भगवान्‌ के आगे तुम्हे उत्तरदायी होना पड़ेगा | अर्तामोनोप ने कुककर हाथ से फर्श छूते हुए कहा-- मुझे मालूम है । पनी भावी पुत्र-वघू से एक भी स्नेह शब्द कहें बिना और उसकी और अपने बेटे की ओर बिना एक नज़र देखे ही उसने दरवाज़े की ओर इशारा कर क्हा-- जादओं |? जब लड़का-लड़की कमरे से बाहर चले गये तो उसने खाद के एक किनारे बैठते हुए दृढ़ स्वर में कहा-- फिकर न करो । सब काम ठीक हो जाएँगे । सेंतीस सा तक मैने अपने राजकुमारों की सेत्रा को ओर कभी किसी विपत्ति मे नहीं फंसा । श्ादमी ईश्वर तो नहीं है । आदमी दयावान नहीं होता । बह सुश्किल से खुश होता है | समधिन उत्याना ठुस भी इसके लिए. न पछुतादोगी । तुम मेरे लड़कों की मा रहोगी ओर उन्हे तुम्हारा सम्मान करने का श्रादेश दिया जायगा | बैमाकोब कोने मे रखे धर्म-चिह्नों की ओर अपछक-दृष्टि से देखता छुआ खुप-चाप सुनता रहा । उसकी आँखां से आँसू बहते रहे श्रोर उल्याना भी शोती रही । पर यह आदमी खेद-भरे शब्दों मेँ कहता गया-- हाय | यव्सी मित्रिच तुम बड़ी जल्दी हमें छोड़े जा रहे हो । तुमने अपनी ओर ध्यान नहीं दिया और ठीक ऐसे वक्त जब मुझे तुम्दारी बेहद जरूरत है--यह तो जैसे मेरे गले पर छूरी चल रही है । . उसने छूरी फेरने की-सी भंगिमा से अपना हाथ दाढ़ी पर चलाया और




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