सारबचन छन्दबन्द भाग २ | Pothi Sarbachan Radhaswami Najum Yani Chhandband Volume-ii

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Pothi Sarbachan Radhaswami Najum Yani Chhandband Volume-ii by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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रदसवसााायाणााणाणाणणााणाणाणाााणाणाणाणाणाणाणाणाणाणयण-अुज्स्प्पछ्माट बचन २२ . भेद काल व दाल मत का ३ करें फयोद दाद नहि पाव । . रोवें सहीसें चोर चिल्लाव ॥ २४ ॥ बार बार सर चौरासी वोह न काठे उनकी फासी ॥ २४ ॥ . सल सिसत च्मौर बेद पुरान। सबक्ती सारे इनकी जान ॥ १९ ॥ साया काल बिखाया जाल । ं द्ापसे स्वारथ करे बेहाल ॥ ९० ॥ वोई गोठ न जावे घर को । यहाँ ही खेल खिलावे सब को ॥१८ ॥ सुतपरुष देस्खा यू हाल | . दाल छुच्ा जीवन का व्याल ॥ १४ ॥ .. बने स्वाद जीव अरसावे । चला रुारा काल न बताये ॥ र० ॥ पंरूष दयाल दया उजगांइे । सुंत रुप घर ऊग में स्यादे ॥ २९ ॥ लदेन को बहु बिधि समसाया । नाल चिदेडे तुस को खाया ॥ सर | के इन्साफू । 1




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