भारतीय हिन्दू मानव और उसकी भावुकता | Bhartiya Hindu Manav Aur Uski Bhavukta

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Book Image : भारतीय हिन्दू मानव और उसकी भावुकता  - Bhartiya Hindu Manav Aur Uski Bhavukta
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भूमिकान प्राणेन नापानेन मर्त्यों जीव ति कश्चन । इतरेण तु जोचन्ति यस्मिन्नेताबुगशरिती ॥जिस फेन्द्र या मध्ण्स्य प्राण में ऊप्यंगति प्राण भीर 'अधघोगति अरान दोनों की प्रन्यि है, खसफी पारिभापिष सहा व्यान है.। उसो को यहाँ साकेतिक भापा में इतर कद्दा गया रै । प्रायं अपान दोनों उसी फे भय से संचालित होते ह । घौर मी- (मध्ये चामनमामीन स्ये देवा उपासते! ।यष फदर या मण्यप्राण॒ या धामन द्वना सराफ मौर धलि्ठ है फ खष्टि फे सव देवषा इसफी उपासना फरते हैं । सी फे ददपम्यिव घन या यत से तर सय पेयो फे यल सन्तुलिघठ होते हैं. । यदद थामनरूपी मध्यप्राण दी समस्त पिश्ष मे पनी रश्मयो से फल कर पिराद्‌ या वैप्णयरूप पारण फरता है ) विप्मएुरूप महाप्राण दी एदयस्य वामन फे रूप में सब प्राणियों फे मीतर प्रतिष्तित है । इसी फे सिये श्दा जाता है--'स दि वैष्यवो यदु दामन ” ( शत० ५।२५४ )हृदयस्थ घामनरूपी पिष्णणु किसी प्रफार अघमानना फे योग्य नदीं है) बही चषिषाल्ली सद परिपूर्ण '्ीर स्पस्थमाथ हे. । जो मानष इख छेनद्रस्य-माथ मे स्थित रदषा ६, षही निष्ठाया मानव हे. । जिसका केन्द्र विचा पी दे, कमी कुछ, कभी फुट सोचता और शाचरण॒ फरता है, षी माघुफ मानष ट । फेमद्र स्थरं दए चिना परिषि या मष्िनामण्डल शुद्ध घन ही नहीं सफता 1 प्वार खयो मे पिम प्रस्तुत प्न्य में नेष्ट प्रकार से यही प्रतिपाथ विपय है कि मानव को अपने उस निप्ठासम्पन्न स्वरूप का परिचय प्राप्ठ हो । आत्मा बुद्धि, मन अं र शरीर इन 'चारों विमृतियें में ात्मा ओर युद्धि फी अलुगत स्थिति फा नाम निष्ठा दै भर मन एव शरीर की 'अनुगत स्मिति फा नाम माधुकता दे. । प्रायः निश्ेल संफ़श्प-विफल्प बाने मनुष्य मन और शरीरानुगत रदते हुए अनेक ख्यापारों में प्रयूत्त होते हैं. । जो बुद्धि मन को '्पने बश में र लेती है, उसी फो धष मापा मे मनीपा कते हं । विस ध्यविषाज्ञी सट घुदधि मे पयव के समान घुष या मरण निष्ठा दोती दे रसे दो घिपणा कहते हैं । वेविकमाया में इसी भरमाखण प्राण के करण हसे '्थिपणा पापतेयो ' कषा जाता है. ।_बारम्वार यदद प्रश्न उत्पन्न होता दे कि मारतीय मानय घर्ममीरु दोते हुए भी सर्वया अमि- भूत क्यों है. ? सका ज्ञान आर कर्म इस प्रकार एुषटिव क्यों बना हुआ हे ? इस प्ररन का सान- पोषिव समापान यही ह क़ि मारतीय मानय भस्यन्त मादुक हो गया दै । इसने अपना प्राचीन




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