रामायण आठो काण्ड | Ramayan Aatho kaand

Ramayan Aatho kaand  by श्री गोस्वामी तुलसीदास - Shri Goswami Tulsidas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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शप्दद+ शब्द दतबियटापी हपदर सप्दरियाप्ियापिफ्रॉिपद्राि चोफिफलिफ्राइ पोफपलािपल्राघा उबर बट | | १२ रामायण माहात्यय थकि सो रहे दूत सुनि बानी & धनि श्रीरामायण महरानी ॥ ? दोहा--रामायण तेजश्वरी सत भाषा शिर मौर । यमपुर जाको शोर ह समताको नहिं और ॥ ९ ॥ पातक महा लग्यो किन होई & रामायण सुनि रह्यो न कोई ॥ चाहे चारो फल का साधन के करु रामायण को आराधन ॥ रामायण सुनि पाप. पराने # जिमि हिम ऋतु महँ मशकनसाने ॥। कलियुग तरन उपाय नु कोई क& राम भजन रामायण सोई ॥ कथा रामायण की जहें होई & सो. ग्रह ग्रह मति जाने कोई ॥ सो घर तीथ रूप सम भागे # तहाँ गये सब पातक नागें ॥ पाप बास देही मह तब ठग छ श्रीरामायण सुने न जब ठग ॥ उदय पुरानी पुण्य होय जब क& रामायण महँँ मन लागे तब ॥ दोहा-रामायण के सुनतही छटि जाय प्रेतत्व । जाके पढ़े सने ते सूकत हे परतत्व ॥ १० ॥। को जाने रामायण को रस & यह तो है सन्तन को सरबस ॥ बनज सनेही अलिगण जेसे क भक्तन प्रिय रामायण तेसे ॥ त्यागि भक्तजन ग्रन्थ अनेक के धारण किये रामायण एकू॥ । । । प प्र पेट को पेड के बेड के गेट के ८ 2 अं 2... उ८22 42 सब उ.टबट भक्तन करें है भक्ति. अनूपा & रसिक जनन करहेँ है रस रूपा । ज्ञान मयी तिन कहें जे ज्ञानी छ तुलसी तारण तरण बखानी। काम क्रोध रुज बरा संसारा छ# औषधि रामायण अनुसारा। रामायण मरहेँ नेह न जाको # जीवत शावसम जानिय ताको ॥ रामायण जाकहें प्रिय नाहीं & यथा जन्म ताको जगमाहीं ॥ दोहा--रामायण अम्रत कथा लेत न ताको स्वाद । तिनको निश्चय जानिये हैं परे दनुजाद ॥११॥ रामायण बिधि कहो विशारद # सनत्कुमार सो भाषी नारद ॥ सहित विधान सुने जो कोई # सहज मुक्ति पाते नर सोई ॥ । कार्तिक माघ. चेत. चितलाई # नवदिन कहे कथा सुखदाई ॥ ब्रह्ममुहर्त समय हो. जबहीं & कर्म करे _शौचादिक तवहीं ॥ करें दन्तधावन लट जीरा # मज्जन करे धरे मन धीरा ॥ £ अई दाग चित उटि वि उंटि बदन व्िचटि पद दि वद चंद काका सह व द्धट पद शिचे ्रद दट सदी बदध शियटि विज दिए बट बैच व भिनीा जकोकज़ोार कार दनजोद वार दानिवजा कि द्नाप्काचाथिलारद्राकचजादा जा द्वारका १0 हि दे २ डे २ बे जे उप के डे के ये की 2 3 2 उद




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