आदर्श रामायण | Adarsh Ramayan

Adarsh Ramayan by चौथमल जी महाराज - Chauthamal Ji Maharaj

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पू्ाद व] दोद्दा घनयादन ये. श्ूपत # यड़े. प्रतापी भूप । मान छुपे लोचन लखस # मफरप्चज सम रूप ॥ १० ॥ चौपाई रद घनघाहन सम्दर सुख धघामी # लका राज़ करत निश फामी 1 मद्दा राक्षस सुंत तस प्रतापी # तासु राज सिलक दियो थापी ॥ घनधाइन तप वुत वन जाई # मुक्न गये फीनी घतुराइ । मद्दा राद्स फर न्याय समारा # प्रजा घत्सल्य भूपत भार ॥ सुर राक्षस हुआ सृत जाफे # दिया राज तप किया अघा के । अपन दृप सद्दावत धारे # अधिर जगत्‌ स फिये फिनारे ॥ सुगत गये गति पचम पाई # कारम सिद्ध किया मन लाई । सुर रास नीति अश्ुसारा # करे याज्र मन इपे झपारा ॥ दोष्दा अखस्यात भूपत. हुये # ये. यड़े. धलयान 1 लप सयम मम आदुरो # कीनो मोझ पयान ॥ ११ ॥ पचौपाई शीतलनाथ इये रुपकारा # द्शघ तिर्थकर खुखकारी । तिन शासन थ ढ़ों सुस्व साजा # कीरत घयल नरेंद्र वियजा ॥ य आउइम्वर दे अति सारी # लकपुरी के चप भ्धिकारी। घह्ी का समय शति नीफ्ा # पर्वत रजस ख्गर गुम टीका ॥ नगर सुमिधमापुर अधिशपा # जई राज ही सूप स्गेशा । ताु नारि घीमती अति प्यारी थी कंड सुल अति दिसफारी घिचाघर भूपत अति भारी # युणवन्तो सस सुवा घियारी 1 मारी छस मय वातुर नौकों # कुमति कुंविया फो नदी सकी ॥




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