राजपूताने का इतिहस जिल्द 5 भाग - 1 | History Of Rajputana Vol. - V Part - I

History Of Rajputana Vol. - V Part - I by महामहोपाध्याय राय बहादुर - Mahamahopadhyaya Ray Bahadur

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श्र काव्यम' ( संस्कृत ) प्राचीनता की दृष्टि से उल्लेखनीय हूँ । पदले में राच थीका से लगाकर राव जेतसी श्रौर दूसरे में राव वीका से मद्दाराजा रायसिंद तक की घटनाश्रों का वन है । इस राज्य की सब से पहली क्रमघद्ध ख्यात मददाराजा रत्नसिंह के व्मादेशानुसार उसके समय में सिंदायच दयालदास ने लिखी थी जिसमे राव बीका से लेकर मद्दाराजा सरदारसिंद के राज्यारोदण तक का सविस्तर इतिहास दिया गया है । दयालदास चड़ा योग्य श्लौर विद्वान व्यक्ति था । उसे इतिद्दास से बहुत प्रेम था । उसने बड़े परिश्रम से पुरानी चंशावलियों, पढ़ें, बद्धियों, शादी फ़रमानों श्रौर राजकीय पत्न-व्यवह्दारों ादि के श्ाधघार पर झपनी ख्यात की रचना की, जिससे यद्द वीकानेर के इतिदास की दृष्टि से बहुत उपयोगी दे । इसमें कई फ़ारसी फ़रमानों की नागरी श्क्षरें में प्रतित्तिषिं तथा अंग्रेज़ी मुरासिलों के छानुवाद भी दिये दें । दयालदास का लिखा इुआआ दूसरा तद्धिषयक श्रन्थ 'झ्ा्योख्यान कटपदुम' है । यद्द निर्विचाद है कि इन दोनों ग्रन्थों को लिखते समय द्यालदास ने बहुत छान-बीन की, पर बीकानेर के राजाओं के स्मारक एवं झन्य संस्क्त लेखों का उपयोग उसने बिलकुल न किया, जिससे कद्दीं-कही संबतों में ऱालती रह गई है । 'देश दर्घण', 'जोधपुर राज्य की वृदददु ख्यात' श्रौर कबिराजा बांकीदास के 'पेतिद्दासिक बातें' नामक श्रन्थों में भी बीकानेर राज्य का बहुत कुछ इतिहास मिलता दे । इनमें कह्दी-कद्दीं विभिन्नता पाई जाती है, जो स्वाभाधिक ही है, क्योंकि ख्यातों श्रादि में उनके लेखकों के झाश्रयदाता्ओों का दी श्धिक प्रशंसाटमक वर्युन रदता है | वीदावतों की ख्यात में भी वीकानेर राज्य का इतिहास है, पर इसमे वीदावतों का दी घणुन झधिक विस्तार से लिखा गया है श्ौर कद्ीं-कद्दी कई बातों का शनुचित श्रेय भी उन्हीं को दिया है । याहर के लेखकों में मुंदशोत नेणसी की ख्यात दयालदास की ख्यात अ्ादि से झाधिक प्राचीन हे श्र वद्द इतिहास-च्ेन्न में झाधिकाश प्रामाणिक मानी जाती है, पर उसमें चीकानेर के पदले नरेशों का कुछ विरुटत वर्णन




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