मारवाड़ी ख्यात | Marvadi Khyat

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Marvadi Khyat  by गौरीशंकर हरिचंद ओझा - Gaurishankar Hirachand Ojha

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ष्टं * सुदणोत नैशुसी की ख्यात गढ़ ७० कस; देवलिया ३० फोस, नीमच श५ कोस, मालपुस ५७ कोस, घछौर ससिरचाड़ा “४ कोस । मेवाड़ के पहाड़--रुपजी के निकट का पर्वत देश की सीमा पर है। रुपनी से तीन कोस पूर्व रीछेड़ चाघारे की खाम ( मोड़ ) में है । जीलवाड़ा घर सीछेड़ के वीच झामलमाल का घड़ा पर्वत ४ कोस लम्बा दे। उसके इघर केलवा ब्ौर चाघेरि के झागे घाटा नामक गांव है। उसके परे भोरड़ का मगरा उत्तर दक्षिण ४ फोस लम्वा है। भारड़ चौर गछावला के मध्य समीाचा गांव कुम्मावत 'सोसोदियें! फा निवास स्थान है । समीचा उदयपुर से १७ छोर रूपजी से १९ छोर झम्मलमेर से १० फोस के अन्तर पर है। उसके आगे मछावला का मगरा सात कोस सम्वा दै जिसके झास पास ६ गांघ चसते हैं--समीचा, मदारड़ा, यरददाड़ा, वरणा, गमण झादि। मछावतले पर चूचावली श्रौर जल की चहुतायत है। उसके धागे वरवाड़ा जहां से दर छौर यनास नदियां निकलती हैं । झागे घासेर फा पदाड़ पक कोस लम्बा झीोर उसके परे पिरडरकांप का पर्वत है। घासेर श्र पिएडरकॉंप के वीच वांसवाड़ा कोतारा (?) ९ कोस और उससे श्यागे पूमण पदाड़ों के पास लोहर्सीग नाम का गांव है, जिसके समीप दी एक छोटी नदी का निकास है । पूमण की लम्वाई उत्तर दुच्तिण ९ कोस और उसके व्यागे इंस- चाल नामी मगरा और कड़ी नाम का गांव है । यद मगरा गिरचे के पहाड़ों से जा लगा है श्ौर उदयपुर से ५ कोस पश्थिम उत्तर की घोर है । जीलवाड़े से कोस 3 घर देखूरी से कोसेक घाणोरा ( घाणराव ) कुम्मलमेर की तलहरी में है । जिससे दी कोस के अन्तर पर कुम्मलमेर का पंत १४ कोस फे घेरे में सादड़ी, चाणुपुर, सेवाड़ी तक चला गया हे । सेवाड़ी गांव कुम्भलमेर से ७ कोस पर है, इसच्ते झागे राहंग का मगसय चुत ही विकट, चहां जल पुप्कल और २४५ गांव उसके झासपास वसते हैं । इस पहाड़ की लम्वाई १६ कोस शोर चविपात्तिकाल में राणा के ठदरने की अच्छी टौड़ है । वद्द सिरोदी की स्णुवा पहाड़ियों से जा लगा है। ( चोदाई ) उसकी कोस १४ श्रौर घेय ३० कोस का है । निकट थो गांवों में सीरवी, पटेल, कुचवी, घ्राह्मण और बनियों वही वस्ती है । गांवों फी पविगत--भाटोदी, भूणोद, मारदय, खुवाइणी, चटड़ी, पादोड़, पिरडवाड़ा सिसेडी दा, देकरिये या घाटा लदां जुटी नदी हे । राग में वालीचों का चतन है। जगा * और रादंग के यीच के स्थल को देसदये (?) देश कहे शऔर घहाँं खरबड़,




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