प्रसूति विज्ञान | Prasuti Vigyan
श्रेणी : स्वास्थ्य / Health

[adinserter block="2"]
Add Infomation About. Dr. Pranjivan Manek Chand Mehta
Add Infomation About. Dr. Ramanath Dvivedi
लेखक :
डॉ. प्राणजीवन माणेेकचन्द मेहता - Dr. Pranjivan Manek Chand Mehta,
डॉ. रमानाथ द्विवेदी - Dr. Ramanath Dvivedi
डॉ. रमानाथ द्विवेदी - Dr. Ramanath Dvivedi
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
36 MB
कुल पष्ठ :
710
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :
डॉ. प्राणजीवन माणेेकचन्द मेहता - Dr. Pranjivan Manek Chand Mehta
No Information available about डॉ. प्राणजीवन माणेेकचन्द मेहता - Dr. Pranjivan Manek Chand Mehta
डॉ. रमानाथ द्विवेदी - Dr. Ramanath Dvivedi
No Information available about डॉ. रमानाथ द्विवेदी - Dr. Ramanath Dvivedi
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)परिशेष्टखण्डशिशु प्रकरण
प्रथम अध्याय--सयोजात शिशु की शारीरिक क्रिया तथा परि-
चर्या-सद्योजात शिशु का रक्षा विधान-भारमापन या तौल-भारमा-
पन-घातन्नीपरिचर्या-घान्रीक्षीर का महात्म्य-नारीक्षीर संगठन तथा
विशेषता-स्तनपायन की विधि तथा निपेघ । ६०५-६१८
द्वितीय धध्याय--स्तन्यपाननिपेघ-द्रव-दुग्ध से पोपण-
मानवीकृत क्षीर-परिशुष्क अथवा शुप्क्रीकृत क्षीर-शुष्कीकृत লনक्षीर--संस्कृत मानवीकृत परिशुप्क दुग्बनवनीकृत दुग्घनिर्देशक
तालिका । ६१६-६२७
तृतीय अध्याय--नवजात शिशु के आघात तथा रोग-मत-प्रसव--नवजात खल्यु -उपशीपं-शिरोर्त प्रन्यि या गुल्म-जन्भवलद्रत रोग-नवजात कामला-रक्तघखावी रोग या रक्तपित्त-युखपाक- ।त्वक्गत स्फार-ध्यात्तेपकटेतु । ` ६२८-६३९
साल्यकूम प्रकरणप्रथम अध्याय--क्न्निम गर्भान््त-गर्भपात कराना-विधियांनिर्देश । ६४३-६४५९
द्वितीय शध्याय--विवत्तन भकार-निर्दश-विधि-निषवेध । ६४९-६८्५४ :
तृतीय अध्याय---शिरोवेघन-निर्देश-विधि-निषेघ । ६ू५४-६५८ :
चतुर्थे अध्याय---ओऔवाच्छेदन, .कोष्टांगच्छेदन, ५छच्छेदनविधि निषेध । ५९-६६ १
पञ्चम अध्याय---वाहु-पाद-मूलाधार-छेदन । विधि निषेघ ६६२-६६५
घए़ अध्याय---गर्भाशयच्छेदन-निर्देश-विधि-निषेध । ६६५-६७४सप्तम अध्याय--संदंश प्रसव-संदंश प्रयोग-विभिन्न प्रकार
सूतिकासंदंश>संदंश के अवयव-निर्देश-विधघान-निषेघ-उच्चसंदंश-
अयोग-निम्न संदंश प्रयोग-पार्श्वासन तथा उत्तानासन में अयोग विधितथा आपत्तियों को सावधानी-अआपुर्वेदोक्त विचार । ६ ७४-६ ८५,
ननन 21092 £
User Reviews
No Reviews | Add Yours...