भूदान - गंगा | Bhoodan-Ganga
श्रेणी : इतिहास / History

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Add Infomation AboutAcharya Vinoba Bhave
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6 MB
कुल पष्ठ :
318
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)हिंसा को इदाना हमारा लच्य १७चिल्लाते रहते हैँ कि लड़ाई न हो, शान्ति रहे, पर उनके हाथ में सिर्फ चिल्लाना
दीहै। कोई भी मूर्ख अपनी दीड़ी घात की गंजी पर फेंके, तो सारे गाँव को
आग लग सकती है। इसी तरद किसी एक मूर्ख के मन में आये और वह किसी
देश पर छीटा-सा श्राक्रमण कर बेठे, तो लड़ाई शुरू हो जायगी। किसी एक
कूटनीतिश का दिमाग चिदु जाय) तो वह सारी दुनिया को आग लगा सकता है |
आज का समाज ऐसा है कि हमने अपना मला-बुरा करने कौ शक्ति चंद लोगों के
हाथ में दे रखी है।अक्सर झपने लिए, भगवान् से सदूजुद्धि देने की प्रार्थना करने का रिवाज
| लेकिन याजा बहुत बार अपने लिए प्रार्थना नहीं करता । वह भगवान् से यही
परार्यना करता है कि “भगवन् | आइक को सदूबुद्धि दे, बुल्गानिन और ईडन को
श्रक्ल दे ।” क्योकि यह जानता ३ छि भगवान् वाचा फो बेवकूफ बनायेगा, तो
चह दुनिया का नुकषान नी कर सकता । लेकिन श्रगर वह ईडन, श्रादक प्रर
बुलणानिन को शक्ल न दे, तो दुनिया खतम हो जायगी । इसलिए बाद ने कुछ
হাথ छोड़ दिया श्रौर केवल परार्थबुद्धि से उन लोगों के लिए प्रार्थना करता है ।
वह इससे भी एक बुनियादी बात करता है, जो प्रार्थना है और प्रयत्न भी। प्रार्थना
यह है कि “भगवन् , तू हमें ऐसी बुद्धि दे कि हम अपना कारोबार चद लोगों के
हाय में न से 1? श्रौर यही हमारा प्रयल है, जो भूदान, संपत्तिदान के जरिये
चल रहा है | इसलिए, बाबा का दावा है कि भूदान के जरिये विश्वशांति के लिए
जितनी श्रच्छी कोशिश दो रही है, उससे ग्रधिक कहीं दोती है, यद वद
नहीं जानता।जनून चाहिएहम आपको भूदान का बुनियादी विचार समभाते हैं, तो हमारा काम पूरा
होता है। श्रमो दम श्रौर ४-५ महीने आपके प्रदेश में रहेंगे। लेकिन वैसे आप
चाया का मन अंदर से देखें, तो श्रापको दूसरी ही चीज दीखेंगी। श्रगर यहाँ
अद्िंसात्मक क्रान्ति की कोई सूरत दौख पड़े, वो चावा तमिलनाड़ छोड़ना दीन
चाहेगा। बाबा का लोम किसी एक प्रदेश, जिले या योर से नहीं, उसकी श्रासक्ति
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