हमारी समस्याएं | Hamari Samasyayen

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Hamari Samasyayen by वीर सावरकर - Veer Savarkar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हमारा हिंदू राष्ट्र & कान निकलकर वी कि दो सौ का समान मब्य भूत काल हमारे पीछे खड़ा है श्र भविष्य काल एक इतिहास शर पुक भविष्य इन दोनों शक्तियों से हम एकजीवी राष्ट्र हैं दो सौ वर्ष के समान भूतकाल से एकन्न निवास से. सुख-दुख के समान उपभोग से यदि श्रमेरिका के सच्श अनेक वंश जाति तथा भाषा के से भरा हु जनपद एकजीवी राष्ट्र हो सकता है तो पौराशिक का श्र ति-रामायण-महाभारत का युगगणुय काल यदि छोड़ भी दिया जाय सो भी हम हिन्दुश्नों के पीछे चस्द्गुप्ठ से लेकर दो सह से झधिक बर्घों के इतिहास का जो समान महनीय और सव्य भूतकाल हिमालय के समान खड़ा है उसके कारण यह हिम्दू जावि सच्षणों की कसीटी से भी एकजीवी और एकसन्धि राष्ट्र झवस्यसेव है। सप्त राष्ट्रों सें विभाजित डय डेन्स झांग्ल नार्मनों के श्राकमणों श्वारा बारम्बार पराशूत और शुलाबी युद्धादिक नि 82 01 हि. 0868 यादवी से पुनः पुनः रक्तरजिंत का इतिहास जब उस राष्ट का समान राष्ट्रीय इतिहास हो सकता है गत शताब्दी तक एक दूसरे की छाती पर परकीय झऋच शझादि शत्र को भी देशद्रोह करके साथ देने वाले सिन्न सिन्न जसन प्रान्तों का इतिहास भी मापा-संस्कृति- देश-उद्दश्य शराद़ि समान बन्घनों के प्रताप से कम राष्ट्र का यदि समान श्र राष्ट्रीय इतिहास कहखाया जा सकता है तो हम दिन्दुओं को गत दो इजार वर्षों का यह अखश्ड महदनीय समान श्र भव्य भूतकाल के इतिहास को मी हमारे रा््रीय इतिहास का स्थान अआपत करने में समर्थ होना चादिए । अकेसे चीन को छोड़ कर संसार के किसी भी वर्तमान राष्ट्र को इस प्रकार क्रो ऐतिहासिक सम्पत्ति नसीब नहीं है। पुरयमूमिः--इस लेख में केवल जुद्धिवादियों से शुद्धवकं कोटि- क्रम से ही बोलना हे प्रतएुव हिन्दू जाति को एकजीवी राष्ट्र करने में




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