बीसलदेव रासो | Bisal Dev Raso

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Bisal Dev Raso by Barhat Balabakshji

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हू दोते हैं। श्रलमेर में श्रानंद उत्सव सनाया जाता दे | राजा भोज तो कुछ दिन रह कर लौटते समय राजम॒ती को साथ ले ज्ञाता है। तीन मद्दीने के बाद बीसलदेव धार जाता है श्रौर रानमती को लेकर वापस श्राता है श्रौर से राज्य करता है । तन नाल्द यह आशीर्वाद देकर--कि न तक प्रथ्वी पर दूय॑ उगे लगन तक गंगा में जल रहे, नब तक प्रथ्वी पर जगन्नाय रहें तब तक राजा ठुम पर राज्य करते रहो; ग्रंथ समाप्त करता दे । ः ऐतिहासिक तत्व ग्रंथ के झाध्ययन से निय्नलिखित ऐतिहासिक बातों का पता चलता है | (१) वीसलदेव का विवाद घार के राजा परमार वंशीय भोज के यहाँ हुश्रा या । इनकी पुत्री का नाम रानमती या श्रौर उसकी माता का नाम भानुमती था । ः (२) वीसलदेव तीथ॑ यात्रा के प्रसंग में उड़ीसा गया श्रौर वहाँ पर विजय करके बहुत सा घन लाया । (३) वीसलदेव का बड़ा भाई उस समय *नीवित नहीं था जब वह उड़ीसा गया केवल उसकी भावन्न वर्तमान थी । वीसलदेव की बहन का नाम श्रंकन कुँवरि या । (४ ) वीसलदेव उड़ीसा लाने के पूव भी एक बार सात वर्ष के लिये बाहर गया था । (५ ) उड़ीसा जाते समय उसने श्रपने भतीजे को श्रपना स्याना- पून्न बनाया था । (६) वीसलदेव की श्रवस्था उड़ीसा जाते समय २२ वर्प की थी 1. न




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