पृथ्वीराज रासो [चौथा भाग] | Prithviraj Raso [Part ४]

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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९०४ पृथ्वीराज का सारुडे के मुकाम पर डेरा डालना जहा से शाही सेना कल र८ कोस की दूरी पर थी । पृथ्वीराज की सेना का श्रोज चीन । पृथ्वीराज का सात घड़ी दिन रहते से धात्रा करके श्राधी रात के समय शाही पडाव पर छापा जा मारना । दोनों सेनाओं का घमासान युद्ध होना श्रौर मुसल्मानी सेना का पराम्त होना । चन्द पुंडीर का शाह को. पकड लेना । ९०४ पृथ्वीराज का खेत भरवाना श्रौर लोट कर दरपुर में मुकाम करना । २१० पृथ्वीराज का शाह से झाठ हजार घोड़े नजर लेना | २११ कविचद का कहना कि एधथ्वीराज ने इस प्रकार शाह को परास्त कर श्रापका राज्य बचाया । २१९ नेचन्द का कददना कि प्रथ्वीरान के पास कितना औंसाफ है । २१३ कब का उत्तर देना कि उनकी क्या वात पृछते है. प्रथ्वीरान के ्ोसाफ कम परतु कार्य्य बडे हैं । २१४ एथ्वाीराज का पराक्रम वन । २१४५ नचन्द का ऐध्वीरान की उनिद्दार पूछना । २१६ कवरिचन्द का एथ्वीराज की श्रायु बल बुद्धि श्ौर घकल सूरत का न्‌्०्श १०८ १६९४९ १६७०९ ३५४ वर्गान करके पृथ्वीराज को उनिहारना । २१७ नचन्द का कुपित होकर कहना दि. कृषि चूथा वक वक करके क्यों ्रपनी मृत्यु चुलाता है । ११५ पप्वाराज थार जैचन्द का दूर से मिलना घर दोनों का. एक दूसरे डर १६७६ ग्१5 2 २९ दर २९९ २२६ २२४ १२५ २२६ हि रथ १ २६४० को घूरना । जैचन्द का चकित चित्त होकर चिन्ता ग्रस्त होना और कविचन्द से कहना कि प्रथ्वीराज मुझ से मिलते क्यों नहीं । कवि का कद्दना कि बात पर बात बढ़ती है । कंवि का झुइना कि जब श्रनगपाल पृथ्वीराज को दिल्ली दान करने लगे तब श्रापने क्यों दावा न किया । जेचन्द का कहना कि श्रनगपाल जब शाह की सहायता लेकर शए थे तब शाही सेना को मेने ही रोका था| १६७८ कांवि का कहना कि यदि श्रापने ऐसा किया तो राजनीति के विरुद्ध किया । जिचन्द का पूछना कि इस समय स्ाज राजनीति का श्राचरण करने वाला कौन राजा है । कवि का कहना कि ऐसा नीति निपुण राजा प्रथ्वीराज है जिसने श्रपनी ही रीति नीति से अपना बल प्रताप ऐश्वय्य झादि सब बढाया । पुनः कावि का कहना कि श्ापका कलियुग में यज्ञ करना नीति सगत काय्य नहीं हैं । राजा जैचन्द का कवि को उत्तर देना । राजा जैचन्द का कहना कि कवि श्र तुम मेरे मन की बात बतलाओओ | १६८१ कवि का करना कि श्राप मुभे पान दिया चाहते है और वे पान न १६१०६ ६७७ ् डे ३७६ लए एएएएटटआआआआआआथनवव १६५० रनिवास से श्रविवाहिता लौडिया लारहीदे। राजा का पूछना कि तुमने यह कसे जाना | न कर कादर 1. माना के 1




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