मालवा में युगान्तर | Malva Main Yougantar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषय पृष्ठ ७. जयसिंह की दूसरी सूबेदारी (नवम्बर १७२६९-सितम्बर १६, १७३० ई०) „ . ক . १९६ दु. मालवा के अन्य प्रान्तीय मामले (१७१६१७२० द°) .. २०३ ६. मालवा पर मरहठों के आक्रमणों का प्रधान कारण ५ २११ परिशिष्ट क--मण्डलोई दफ़्तर के पत्र -: -`२२३-२२६ ' ॥ परिशिष्ट खझ--गिरधर बहादुर तथा दया बहादुर की परा- जय एवं रत्यु की तारीखे की समस्या - - २२७-२३२६ अध्याय ५--मालवा के लिए मुगल-मरहठा इन्द-- उसका अन्त (१७३०-१७४१ ई०) - -२३७-३२४ १. मालवा का साम्राज्य से सम्बन्ध-विच्छेद 1 9 ॥ २३७ २. मालवा में मुहम्मद वंगश-उसकी विफलता (सितम्बर १६, १७३० ई०--आक्टोबर १२, १७३२ ई० ) + 9. २४१ ३. सवाई जयसिंह को आखिरी सूवेदारी (सितम्बर २८, १७३२ र ०-अगस्त ३, १७२७ ई० ) ५ ६ ४ २५५३ ४. मालवा के लिए अन्तिम दन्द तथा उसकी विफलता; मारवा का साम्राज्य से सम्बन्ध-विच्छेद (अगस्त ३, १७३७ ई०-जुलाई ४, १७४१ ई० ) हि ৫ . 1 २५८५ ५. आवध्निक मालवा का विकास ( १७३०-१७४१ ६० ) क २०७ अध्याय ६--मालवा में मरहठों की स्थापना तथा उनकी सत्ता का एकीकरण--पू्वेक्नाल का अन्त (१,७४१-१७६५ ई०) . - - ३२५४-३६ १ १. इस काल की प्रधान प्रवृत्तियां कह ९.८ ५. ३२५




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