वरदान | VARDAAN
श्रेणी : बाल पुस्तकें / Children

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
387 KB
कुल पष्ठ :
7
श्रेणी :
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विजयदान देथा - Vijaydan Detha
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)४1 मार नोचने के कारण उसकी देह खून से रिसने लगी। चूहे ने इलाज-उपचार हरमें कोई कसर नहीं रखी। पर सब अकारथ! खाज इस कदर बढ़ी कि देखते
देखते उसे कोढ़ की बीमारी हो गई। सारा शरीर चूने लगा। चूहे ने उसकी ८ 2
: बेहद सेवा-बंदगी की, किन्तु रंचमात्र भी लाभ नहीं हुआ। कोढ़ झरने के
हद बावजूद भी वह गुलगुले खाने से परहेज नहीं करती। सोचा कि एक दिन 2
मरना तो है ही, फिर मन में क्यों रखी जाय! श्
एक बार बड़ी कड़ाई में गुलगुले निकालते समय वह झुककर तेल का
खौलना देखने लगी । संयोग का खेल कि झुकते ही उसका पांव रपट गया।
मारने वाले से बचाने वाला बड़ा । संयोग की लीला कि खौलते तेल में गिरने
से जूं का कोढ़ मिट गया। वह झटपट बाहर निकली। कचन के समान ०
उसकी सुन्दर देह हो गई । वह तो नई दुल्हन को भी मात करती सी दिखाईधि
दी। जू का सारा विकृत खून कड़ाई में झर गया। सारा तेल गहरा लाल
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का,छा ५हो गया। गुलगुले निकालने के काम का नहीं रहा। तब चूहे और जू ने ऐ
मिलकर कड़ाई के कड़े पकड़ सारा का सारा तेल तालाब में उडेल दिया। (४५है९)22, हर/! मर
जा
८॥#४| तेल उंडेलते ही तालाब का पानी भी गहरा लाल हो गया।
0६ तालब ने जू से कहा-मेरी बहिना, यह क्या किया तूने? सारा पानीहेकेखराब कर दिया। अब कोन पंछी-जानवर यह गंदा पानी पीयेगा | जू ने वापस
नम्नता से उत्तर दिया-बहिन गलती तो मुझसे हो गई, माफ करना। ठंडे डे
कलेजे से मैं तुझे आशिष देती हूं कि तेरा पानी वापस बादलों के जल जैसा20 ८
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2 जूं और चूहे के जाने पर वहाँ श्रमर के काले हस आये। ने सरवर यो
“कुछ से पूछा-कल तुम्हारा पानी निर्मल व स्वच्छ था, आज इतना लाल कैसे? 326०
2 लहरियां | चले कर उसने
59% सरवर ने लहरियां थिरकाते हुए जूं वाली सारी बात बताई। फिर उसने (
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