ख़ुशी ख़ुशी -कक्षा 4 भाग 1 | KHUSHI-KHUSHI CLASS 4 - PART 1

KHUSHI-KHUSHI CLASS 4 - PART 1 by अज्ञात - Unknownपुस्तक समूह - Pustak Samuh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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एक जुलाहा सूत कातने के लिए रूई लेकर आ रहा था। वह नदी किनारे सुस्ताने के लिए बैठा ही था कि जोर की आँधी आई। आँधी में उसकी सारी रूई उड़ गई। जुलाहा घबराया। “अगर बिना रूई केघर पहुँचा तो मेरी पत्नी तो बहुत नाराज़ होगी।' घबराहट में उसे कुछ न सूझा। उसने सोचा , ''यही बोल दूँगा- फ़ुर्र, फुर्र।” और बह 'फुरर-फुर्र' बोलता जा रहा था। आगे एक चिड़ीमार पक्षी पकड़ रहा था। जुलाहे की फुर्र-फुर्र सुन कर सारे पक्षी उड़ गए। चिड़ीमार को बहुत गुस्सा आया। वह जुलाहे पर बहुत चिल्लाया, तुमने मुझे बरबाद कर दिया। आगे से तुम ऐसा कहना, पकड़ो/ पकड़ो/” जुलाहा जोर-जोर से “पकड़ो | पकड़ो !'' रटता गया। रास्ते में कुछ चोर रुपए गिन रहे थे। जुलाहे की “पकड़ो! पकड़ों |” सुन कर वे घबरा गए। फिर उन्होंने देखा कि अकेला जुलाहा ही चला आ रहा धा। चोरों ने उसे पकड़ा और फिर गुरति हुए कहा , “यह क्या बक रहे हो ? हमें मरवाने का इरादा है कया? तुम्हें कहना चाहिए, इसको रखो, ढेरों लाजो मजे?” जुलाहा यही कहता हुआ आगे बढ़ गया, ''इसको रखो, ढेरों लाओ।' जब वह एमशान के पास से गुजर रहा था तो वहाँ गाँव वाले शवों को जला रहे थे। उस गाँव में हैजा फैला हुआ था। लोगों ने जुलाहे को कहते सुना , ''इसको रखो, ढेरों लाओ,'' तब उल्हें बड़ा मुस्सा आया। वे चिल्लाए, तुम्हें शर्म नहीं आती?” हमारे गाँव में इतना भारी दुख फैला है और तुम ऐसा बकते हो। तुम्हें कहना चाहिए यह तो बड़े दुख की बात है /! जुलाहा शर्म से पानीं-पानी हो गया। वह यही रटता हुआ आगे बढ़ने लगा ,यह तो बड़े दुख की बात है 'कुछ देर बाद वह एंक बारात के पास से गुजूरा। बारातियों ने उसे यह कहते हुए सुना, “यह तो बड़े दुख की बात है , यह तो बड़े दुख की बात है।” इतना सुनकर वे जुलाहे को पीटने के लिए तैयार हो गए। बड़ी मुश्किल से जुलाहे ने सफाई दी तो उन्होंने कहा- “सीधे से आगे बढ़ो, और हाँ, अब तुम यह रटते जाना- भास्व में हो तो ऐसा सुख मिले/ अब जुलाहा यहीं रटता हुआ अपनी राह चल पड़ा। चलते-चलते अंधेरा हो गया। घर से निकलते 5




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