उक्राईनी लोक कथाएँ | UKRAINI LOK KATHAINSOVIET CHILDREN'S BOOK

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भेडिया भी डर के मारे निकल भागा।“नहीं, खरगोश , मैं उसे नहीं भगा सकता। उस जानवर से 9 डर लगता है|! भेड़िया भी दुम दबाकर खिसक लिया। क्‍खरगोश फिर पहले की तरह पेड के नीचे बैठकर रोने-पीठने लगा। अचानक उधर से लोमड़ी गुज़री, उसने खरगोश को रोता हुआ देखकर पूछा:“अरे, खरगोशवे, रो क्यों रहा है?”“ लोमड़ी दीदी, मेरी झोंपडी में एक खतरनाक जानवर घुसा बैठा है! मैं बेघर हो गया हूं। रोऊं न तो क्‍या करूँ? /और लोमड़ी बोली:“मैं उसे निकाल बाहर करूंगी!“ भालू ने कोशिश की, लेकिन हार मान गया, भेडिये ने भी कोशिश की , लेकिन दुम दबाकर भाग गया! आख़िर तुम उसे कैसे भगा सकतीहै 11“देख लेना , अगर निकाल बाहर न करूं! ”लोमडी ने आवाज़ लगाई:“ खरगोश की भोंपडी में कौन है?तब बकरी अलावधर से बोली:/ सबक बकरी , तकक्‌ बकरी , बाल है मेरी उधड़ी-उधडी | उल्हा-पुल्टा मेरा काम,तीन टके है मेरा दाम।दुम को अपनी हिला-हिलाकर , भारुंगी मैं रुला-दंलाकर , तुम्हें रॉदकर , कुचल-कुचलकर , सींग मारकर , तुम्हें फाडकर ! लडना-भिड़ना मेरा काम ,होगा तेरा काम तमाम !लीमडी थर-थर कांपने' लगी और वहां से निकल भागी। 16




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