वैचारिकी | Vaechariki

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Vaechariki by शचीरानी गुर्टु - Shacheerani Gurtu

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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निवेदन “इंचारिकी मेरे सफर निबों का संकछम है। समय- समय पर भौतरी मौर बाहरी प्रेरया बध--कमी पत्र पत्चिकार्मों ते छेशों की माँय के कारण कभी रेडिमो-बा्तामों के रूप में गबबा गई कृतियों व कृतिकारों की विचारधारा को मत पर पड़ी छाप या प्रतिक्तिपा बप जो सलिखतां पड़ता है- उन्हीं छब सेज़ों को संघोधित और परिषद्धित करके प्रस्तुत पुस्तक में दे दिया गया है। शुछ बरसे से राजकीय सेआ में होते के कारण जीवन बहुत ध्यस्त हो पया है। मेरे समय का अधिकतर उपयोय सरकारी कामकात भौर सरकारी हिन्दी के तिर्मात्र में होता है फिर भौ दस मागदौड़ ओर ब्त्यधिर कार्यस्पस्तता में थो साहित्य से मेरा रापात्मक सस्पर्प है उसी का परिणाम है बेचारिकी | इस स्थिति में श्षेसा कि स्वामादिक है विपय चयन में कोई क्रम या ताएतम्य मह्दी है, छिस्धु बाजजूद इसके यदि जिज्ञासु पाठकों क्रो उसके मगोशुरूछ इसमें कोई सामग्री मिरू सकी या बे कोई क्रम या वारतम्य छोज सके तो मुझे प्रसन्तता होगी । ह्ह्हो अ्रभीरानी गुट




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