सन्मति - वाणी | Sanmati Vani

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : सन्मति - वाणी - Sanmati Vani

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about मिश्रीमल जी महाराज - Mishrimal Ji Maharaj

Add Infomation AboutMishrimal Ji Maharaj

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
सम्मति-वांणी 6 २७... बन णन--क- >--रिनीयनाा- न कि फिननीयाक-ल- १९७-७-७०-कनी लकी कल +-न+००२५० ५०३ पिनना-न-4त ननानत-++नननककण न स+त+. (६) जब संक बुटापा नहों सठादा, जब तह स्याजियों नहीं बत्हों, छलब हक ईद प्रयाँ भशक्तः नहीं ट्वोदों, तब ठड धर्म रा आचरण कर लेना धा दिए, बाद में कुछ नहीं होने का | (४) साशधान शरीर का परित्यांग कर के भा शपवत्र इन दा पाक्नन करमा 'ाहिए ! (८) मूंद मनुष्य धमे के मम को नहीं पम्मर एत्त | (४) भोगामिलाषी मनुए्य घ्॒मे पथ प्ले ग्र्ट ('कऋषनद इस पश्चात्ताप करता है|




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now