रोगों की सरल चिकित्सा | Rogon Ki Saral Chikitsa

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ग शन्‍्म और विकास श्ष विरोधियोपर विजय मिली ।:इस उत्पीड़नसे प्रिस्तिजकी कीति एवं प्रतिष्ठा और बढ़ गई। इन विरोधी प्रदर्शनोने उसके लिए एक प्रकारके विज्ञापनका ही कार्य किया। उसमे अपनी सम्थाके समीपके रास्तेके एक पत्थरके समेपर यह अंकित कर दिया था--- तुम्हें धीरण रखना होगा।” इससे यह जाता जा सकता है कि इस साधारण व्यक्तिकी कंसी प्रतिमा थी और अपने कार्यमे सफली- भूत होनेका उसका कितना दृढ़ विश्वास था। इस वाक्यके द्वारा उसने अपने विरोधियोको शिप्ट शब्दोंमें चेताववी दी थी! उसने यह अनुमव किया कि पुरानी बोमारियोंको दूर करनेका एकमात्र साधन यह है कि शरीरके भीतरकी रोग-निवारक शक्तिको तीम्र बताया जाय, जिससे वह गलत भोजन और रहत-सहनके कारण शरीरमे एकत्र हुए विपको वाहूर निकाल दे। लेकिन यह प्रायः एक ऐसा कार्य है जिसमें अधिक समय छगता हे घैरयकी है तथा इसके लिए बड़े घं्यंकी आवश्यकता होती है। ज० स्क्राथ , प्राकृतिक चिकित्सा-अणालीके दूसरे उन्नायक जोहन स्कॉय ([०णा८॥165 50०00) का भी जन्म प्रिस्निजके जन्म-स्थानसे कुछ ही मीलकी' दूरीपर हुआ था। वह एक आस्ट्रियन था। उसमे मुख्यतः व्यक्तिगत अनुमवके ही द्वारा प्राकृतिक चिकित्साका ज्ञान प्राप्त किया। आरममें वह केवल घायल कुत्तो तथा घोड़ोंकरा ही उपचार करनेका प्रयत्न करता था, ठेकिन झीघ्र ही उसने मनुप्योका भी उसी प्रणालीसे इलाज करना शुरू किया। उसकी स्थानीय कीर्ति तेजीके साथ दूरतक फल गई। चेकोस्लोवाकियाके लिडेबीज मामक स्थानपर, जहा उसने एक स्वास्थ्य- जुद्द खोला था; करे तझासक्रे रोगी गहुक्‍ने हे? प्रिस्तिजके संबंधमे जो बातें घटित हुई थीं उनका सामना स्क्रॉयको भी करमा पड़ा। उसके समकालीन डाक्टरों तथा चिकित्सकोने उसका भी विरोध किया। रूगमग २० वर्षतक उसे घृणित और अनुचित गालियां




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