हिन्दी प्रवेशिका पद्यावली | Hindi Praveshika Padyavali

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Hindi Praveshika Padyavali by श्यामसुंदर दास - Shyam Sundar Das

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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बादल श्र>> फ: : :: ८ : :ऊ -:फझप-+सःा ज्ख्च्ऊचल्स्च्य्म्स्स्स्ल्स्स्स्स्म्ल्ः(८ ) बादलझुरपति के हम ही हैं अनुचर, जगत्पाण के भी सहचर। मुग्ध शिली के द्रुत्य मनोहर, ऊषक-बालिका के जलधर॥)जलाशयों - में कमल-दलों सा, हमें खिलाता नित दिनकर । पर बालक-सा वायु सकल-दल, बिखरा देता, चुन सखत्वर ॥लघु-लद्दगों के चल-पलनों में,हमें झुलाता जब सागर । वही च्ील-सा झपट बाद गह, हमको ले जाता ऊपर।ताविएुल करुपभा-से त्रिथुबन की, विविध रूप घर, भर चम-अंक | हम फिर क्रीड़ा-कौतुक करते, छा अनंत-डर में निःशंक॥कभी चौकड़ी भरते सुग-से, भू पर चरण नहीं धरते। मच-सत्त गज् कभी ऊुूपते, सज्ञग शशक बम को चरते)॥




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