वंश भास्कर खंड 6 | Vansh Bhaskar Khand 6

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
23 MB
कुल पष्ठ :
395
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)हर काक्र 5 2, |
(२५९१६) । शमारकर [बिधासिहक चरित्रस३ की 50कोटाप्ति किय सिक्ख अप्प आयउ बडुन्दीपुर ॥दिय सिल्लान सब सेन जतसागश तड़ाग तट ॥दइवजोंग निस समय आग्गि ल्ग्गिय छेर्न पठ॥॑...सर सेतु मध्य झद्द पिंहित इक १सजि रू तत्थ बर बने रहि ॥
हसम डेरन सहित मझुज तरंगह कछुक दहि ॥ ३ ॥दारुन उतपात दान सत दोच२०० सबिधि दिय ॥ज नगर द्वार उत्तर प्रवंस कय ॥
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हिल्ले रेवापार नाम निज नगर बसायों ॥
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पिह्ठि तत्व तहां. छ।र भस्म. हसस वंसभच., यह हसमभ दाब्द दर्शी पाते उदाहरण, “इससे, हय थाय दृद्ा आत्ति/। घह दोहाकी चरन ए-धवीराजरालेले महंज्दा खमें है. अर और टोरहु रासे में बहुत प्रयाग हैं अरू..
सुसलमसान कहे हँ कि हमारे वेसवक्तों नाप्त दशसत् है ताफो यह भथों है, पर-म्तु याम तकार हयात देशीप्राकृत ही मान्यों- सघुज मनुष्य, दहे ज-
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