रामचरितमानस | Ramcharitmanas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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चित्र-परिचय .... भिन्न भिन्न चित्रकारों के बनाये भिन्न सिंघ्र झवस्था के गोस्वामी तुलसीदांसजी के तीन चित्र रामचरितमानस में लगे हैं, उनका परिचय ऐतिहासिक पुसुतकों घर किस्बदृन्तियों से जहाँ तक उपलब्ध डुझा चई प्रकाशित किया जाता है । (है) इस पक रंगे चित्र को बाएशाह छाकबर के चिन्नकारों ने सम्बत १९९५ चिक्रमाध्द केदलगभंग; बनाया, उस समय गेपलॉईजी की झवस्था ३६ चर की थी शांर वे तपश्चर्य्या में श्रदुरक्त थे। इतिद्ास से पता? चलता है कि चांदशाद श्रकथर श्रपनी राजसभा में प्रत्येक मत के दिद्वानों को घरखने का झनुरोगी, और प्रसिद्ध महात्मा पुथपी के चित्रों का संग्रह कर अपनी चित्रशाला सजचाने का बड़ा शौकीन था । झकबर का प्रकिद्ध घज़ीर नव[व खानखाना शोस्वामीजी पर श्र्मत्त प्रेम ' मस्खता था ।.बहुतःसम्भव है. कि यदद लि उसी के उद्योग से बन कर शा ही खिघनालय में रकलां गया ' हो । पहले; पदल इस चित्र को लंड़न के किसी समाचार पुत्र ने प्रद्वाशित किया श्रौर उसी के द्वारा इसका भारत में प्रचार हुआ है । :. (रे) दूसरा चित्र वाद्शाह जहाँगीर के चिज्ञकार्खे ने सस्वत्‌ १६९५ विक्रमाव्दू के लगभग निर्माण ,कियां हे।गा; ब्यौकि ज़हाँगीर सम्बत्‌ १६९२ से १६८४ विक्रमाब्द' पर्यस्त दिल्ली के रटसर पर विशजमानं था । उस समंय गे।स्वामीज्ञी की श्रवस्था ७६ चर की रही देगी । गासाँरजी के जीवनचरित्र में लिखा है कि बादशादद जददॉँगीर उनसे मिलने काशी श्वाया था । बादशाह उनपर बड़ा प्रेम रखता झोर उन्हें पूज्यडष्टि से. देखता था। एकबार गोस्वामीजी भयंकर व्याधि से . शस्यन्त पीड़ित हुए थे, सम्भव है कि उनकी बीमारी का समाचार पाकर घह् रेइवश काशी झाया ' हो हर उसी . समय श्रपने चित्रकारों को चित्न लेने की 'हाश्ञा दी है, इसी से यह चित्र की 'रेगसुक्त झवस्था का लियां मालूम होता है। उन दिनों गोस्वामीजी 'प्रह्दघार पर पं० गंगा _ 'राम जोशी के यहाँ निवास करते थे। पं० गंगाराम गोसॉईजी के मित्रों में फहे जाते हैं, शादी चित्र- कारों से मिल कर किसी प्रकार उन्देंने इस चित्र की प्रतिलिपि प्राप्त कर ली दो तो. शाश्चय्य दा क्योंकि सना जाता है कि उनके चंशजो,के पाल वदद चित्र झवतक खुरक्षित है | वर्तमान, कॉल के पं० रणंजोड़लाल व्यास अपने को पं० -गंगांराम ज्योतिषी का उत्तराधिकारी बतलाते हैं | उन्होंने सन १६१५ इं० में गोस्वामीजी की जीवनी लिखवा कर प्रकाशित करायी है लए उस पदों दर . चित्र भी,दिया है । ब्यांसजी 'कां कथन है कि यदद चित्र बादशाद जदाँगीर ने सस्वत्‌ दा १ जयपुर: के किसी कांरोगर से ' बनवाया थां.। परन्तु उस समय तो झकबर गद्दी पर था ्ि जद्दगीर राजकुमार था, बदद ते सम्बत १६६२ में गद्दी 'पर बैठा था| यदि यद व ह राजकुमार, की अवस्था में दी जद्दॉगीर ने चित्र बचाया ते सम्भव, नहीं, क्योंकि च की थी : के बाद उसने गोस्वामाजो को बुलवाकर एक बार जेल में बन्द करवा बन दा कि हा | कुमार की अवस्था में गोस्त्रामीजी का प्रेमी दादा ते सन की ह की लग कपिल जल से बन्द करने एर वह उनके महत्व ले करन प्रेमी हुए श्रौर तभी खिन्र यनयाने सी ाश




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