राज सिंह | Raj Singh

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutAcharya Chatursen Shastri
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
14.62 MB
कुल पष्ठ :
242
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about आचार्य चतुरसेन शास्त्री - Acharya Chatursen Shastri
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)राजासिंह पहिला अडडू व पहला दृश्य (सर्थान--उद्यपुर का एक प्रघान बाज़ार । समय ध्रात काल् 1 दो नागरिक सड़क पर खड़े बातचीत कर रदे हैं । बाज़ार बन्दबवार और पताकाओं से सजा डा दै ॥) वक नागरिक--रत्वतुला । सुना तुमने ? दूसरा नागरिक - सुनने की एक ही कही । मैं इन्हीं श्रॉखों से देखकर था रह हूँ । पद्चिला सागरिक--सच ? तो तुम श्री एकलिज्न गये थे ? दूसरा-नहीं तो क्या तुम्हें तो मालूम ही दै वहाँ मेरी साली का घर है | वही जो पद़िलां-( बात काट₹र) तो तुमने मद्दाराणा का रत्नतुला अपनी आँखोंसे देखा?
User Reviews
No Reviews | Add Yours...