राज सिंह खंड - १ | Raj Singh Khand -1

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6.48 MB
कुल पष्ठ :
232
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)रासतब बुढ़िया ने विशेष रज्ञ चढा कर चित्र के कुचले जाने का सारा दाल
कह सुनाया |सिम शनिपॉचवाँ परिच्छेद
दरिया बीवी
वढिया के लड़के का[ साम था शेख खिज्र । वह चित्रकार था । उसको
दिल्ली में दुबइन थी । मां के पास दो दिन रद्द कर वद्द दिल्ली चला गया ।
दिल्ली में उसबी बीवी थी । चह्द दुकान में ही रहती थी । बीवी का नाम था
फातिमा । ख्ज्र ने श्रपनी मां से रूपनगर का जो दाल सुना था, वह सब
फाहिमा से कद दिया । रुव वां दताने के वाद खिज् ने फातिमा से कहा--“पुम घभी दरिया बीवी के पास जाश्रो । इस समाचार को वेगम सादा के
यहां देचने को कददना--शायद कुछ मिल जाय |?”दरिया बीवी पास के ही मुदान में रहती है । मकान के पिछुवाड़े से
जाने की रादद है । इसलिये फातिमा बीवी दिना पर्दे के दी दरिया बीवी के
घर ला पहुँची ।
खिज़ या फातिमा का विशेष परिचय देने की जरूरत नहीं पड़ी; किन्दु
दरिया बौवी का दिशेष परिचय चाहिए ही । दरिया वीवी का श्रसल नाम
द्रीदुलिसा या ऐसी दी डुछ है। दिन्तु इठ नाम से कोई “उन्हें दुलाता न
या--लोग दरिया चीवी द्दी कदते थे । उसके मां-बाप नह्दीं थे, केवल बडी
द्न श्रौर एव चूटी पृफी या खाला, ऐसा दी बुछ थी । मकान में कोई मदद
नहीं या। दरिया बीवी दी उम्र रुघद वर्ष से श्रघिक नहदीं--उसपर छुछ नाटीथी, पन्द्रद दे से श्राघिक नहीं लान पब्ती थी । दरिया वीवी बहुत सुन्दूरी थी,
खिले हुए, फूल जैसी, सदा खिली हुई ।न

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