ज्ञान और कर्म | Gyan Aur Karm
श्रेणी : धार्मिक / Religious

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutGurudas Banarji Naiit
Add Infomation About. Pt. Roopnarayan Pandey
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
14.99 MB
कुल पष्ठ :
404
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखकों के बारे में अधिक जानकारी :
गुरुदास बनर्जी नाईट - Gurudas Banarji Naiit
No Information available about गुरुदास बनर्जी नाईट - Gurudas Banarji Naiit
पं. रूपनारायण पाण्डेय - Pt. Roopnarayan Pandey
No Information available about पं. रूपनारायण पाण्डेय - Pt. Roopnarayan Pandey
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)१७कन्याका चुनाव कौन करे ?--चहुविवाह ठीक नहदीं--विवाहका
समारोदह--विवाहसम्वन्धका स्थितिकाल झक «न २०
ख्रीको शिक्षा देना--ल्रीको सुखी रखना पर विछासप्रिय न वनने
देना--स्वामीके प्रति खीका प्रेम और भक्ति--विवाहसम्वन्धका- तोड़ना «८ हा श्र सा का सस्र पेंडेंप
चिरवेधव्य विघवा-जीवनका उश्चाददी है--प्रतिकूल और अनु-
कूल युक्तियेँ। मय कि कि सर नपुन्रकन्याके सम्बन्धमें कतैब्यता--दासदासियोंपर भरोसा--रोगमें
चिकित्सा और सेवासन्तानकी शिक्षा--आध्यात्मिक और नीति-
शिक्षा--धर्मशिक्षा--पुत्रकन्याका विवाह गम न ने
-उसामाजिक नीतिसिद्ध कर्म ।
सामाजिक नीति--साधारण समाजनीति--विशेष समाजनीति ,.. २७६
जातीय समाज और उसकी नीति--हिन्दूसमाजमें जातिभेद--
पड़ौसी समाज और उसकी नीति--एकधर्मावलम्बी समाज--
धर्मानुदीलन समाज--ज्ञानानुशीलन समाज--सभ्य निर्वाचनकी
'विधि-- भर न स्क सर न,» २८६
धनी और मजदूरोंका सम्बन्ध--हड़ताल--एकहत्था व्यवसाय--
वकील वैरिस्टरोंका कर्तव्य--चिकित्सकॉंका कर्तन्य--गुरुदिष्य-
सम्बन्ध--प्रभुभत्यसम्बन्घ और उसकी नीति. ...« न ३०४
१--उराजनीतिसिद्ध कमें ।
राजाप्रजासम्चन्धका स्थूल निर्णय--इसकी सुष्टिके चिघयमें मत -
भेद--इसकी स्थिति बे अ बस्ड >> डरे
राजतन्त्र और राजाप्रजासम्वन्धके अनेक प्रकार--एकेश्वरतेत्र--
विदिष्ट प्रजातंत्र--साधारण प्रजातंत्र--भिन्न भिन्न कासनप्रणा-
छियेंकि दोष गुण ... थ् के गा «न रेरे९,
ब्रिटेन और भारतका सम्बन्घ--प्रजाके प्रति राजाका कर्तव्य--
राज्यकी शान्तिरक्षा--प्रजाकी प्रकृति और आवश्यकताओंका ज्ञान
-रखना--प्रजाकी शवार्थ्यरक्षाका प्रवन्ध--जाने आनेके सुभीवे--
अ्रजाकी दिक्षाका प्रवन्ध--म्रजाको अपना सतामत प्रकट करने
User Reviews
No Reviews | Add Yours...