सोहन - काव्य कथा - मंजरी भाग - 2 | Sohan Kvya Katha Manjari Part - 2
श्रेणी : कहानियाँ / Stories, साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutMr. Sohanlal Shastri
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3.21 MB
कुल पष्ठ :
106
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about श्री सोहनलाल शास्त्री - Mr. Sohanlal Shastri
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)दोहा -- कही पति से बात यह सुन कोपा तत्काल | कंसे फेंक दी उसने मणि को समझा मैं नहीं हाल ॥। मांगलू उनसे मैं जाई ॥४॥। भागवत चल करके श्राया मणि दो मुख से दरसाया । नदी में भेंट कर श्राया भक्त ने ऐसे फरमाया ॥। दोहा --... लोग इकट्ठे हो गये सुनकर सारा हाल । कहे दबा ली इसने मणि को करे श्रसत पंपाल ॥। सभी को रहा है भरमाई 11६।। श्रापस में करे बात ऐसी वक्त यह श्रा गई है कैसी । भक्त बन करे है ठग जैसी मणि रख करे बात ऐसी ॥। दोहा --.... भागवत भी कह रहा करो न ऐसा काम । मरि झ्रापको देनी होगी समभो हिए तमाम ।। दबेगी हरगिज यह नांही 1 ७॥। भक्त कहे डाली नदी के मांय चलो वहां तटिनी में सिल जाय । भागवत कहे मुझे बहकाय गई वह जल में कंसे पाय ॥। दोहा --.... भक्त सभी को साथ ले नदी किनारे श्राय । बहती जल की धार में वह डूबकी सद्य लगाय ॥। पहुँच गया जल के तल मांही ।।८॥। मुट्ठी भर कंकर ले श्राया कहे ये मशिये ले भाया । लोग कहे दिमाग चकराया कंकर को मणिये बतलाया ॥। दोहा - ... लोहे की मंगवाय के दीना त्वरित झ्ड़ाय । कंकर सब पारस बने कंचन लख विस्माय ॥। भक्त की जय जय सब गाई ।।€॥। श्रद्धा हो जिसके दिल मांही कमी का काम वहां नांही । मनुष्य क्या देव चरण मांही गिरे नित स्वर्गों से श्राई 11 दोहा --... संशय इसमें है नहीं सुनो लगाकर कान | जग जंजाल से निकल सज्जनो भजो सदा भगवान ।। छोड़कर तृष्णा दुःखदाई ।1१०॥। श्रवण कर कथा ध्यान दीज्यो सुकत की गठड़ी संग लीज्यो । बुराई सन से तज दीज्यो भावना उज्ज्वल कर लीज्यो ॥। दोहा --... प्राज्ञ कृपा सोहन मुनि सदा रहा चेताय । अाश्रव तज संवर में आवो जीवन सफल बनाय ॥। मिलेगी. . मुक्ति सुखदाई 11११॥। # हक 5 9
User Reviews
No Reviews | Add Yours...