गोम्मटसार ( कर्मकांड ) भाग २ | Gommatasar Karamakand Part 2

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Book Image : गोम्मटसार ( कर्मकांड ) भाग २  - Gommatasar Karamakand Part 2

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आदिनाथ नेमिनाथ उपाध्ये - Aadinath Neminath Upadhye

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कैलाशचंद्र शास्त्री - Kailashchandra Shastri

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मिथ्यादृष्टि आदि अपना मुणस्थान छोड़कर किन गुणस्थानोंकों प्राप्त होते हैं किन अवस्थाओं में मरण नहीं होता नाम कर्मके बन्घ स्थानोंके तीन प्रकार इकतालीस पदोंमें भंग सहित स्थानोंका कथन उनमें भुजाकार बन्व लानेका त्रं राशिक्‌ यन्त्र उनमें अल्पतर भंगोंका कथन मिथ्यादृष्टिके भंग लानेकी लघु प्रक्रिया असंयतमें भंगोंका विधान असंयतमे अल्पतर अप्रमत्त आदिमे भुजाशार उनको उपपत्ति अप्रमत्तमे अल्पतर नाम कर्मके सब भुजाकारादि बन्धका यन्त्र उन भंगोंकी उत्पत्तिका साधारण उपाय अवक्तव्य भगोका कथन नाम कर्मके उदयस्यान सम्बन्धी पांच काल तथा उनका प्रमाण पाँच कालोंकी जीव समासोंमें योजना नाम कर्मके उदय स्थानोंकी उत्पत्ति का क्रम नाना जीवोंकी अपेक्षा उक्त कथन उन स्थानोंके स्वामी उन स्थानोंका कथन नाम कर्मके उदय स्थानोंका यन्त्र नाम कर्मके उदय स्थानोमे भग इकतालीस जीवपदोंमें सम्भव भंग पुनरुक्त भंगोंका कथन नाम कर्मके सत्त्वस्थान उनकी उपपत्ति दस भोर नौके स्थानोंकी प्रकृतियाँ श्देलना स्थानोंका विशेष कथन षढेलनाके अवसरका काल उनका लक्षण तेजकाय वायुकायमें उद्दे लन योग्य प्रकृतियाँ सम्यक्त्य भादिकी विराघना जीव कितनी बार करता हू विषय-सूची ९०३ ९०४ ९०५ ९०६ ९१२ ९१० ९१५ ९१८ ९१९ ९२० ९२२ ९२३ ९२५ ९२६ ९२७ ९२८ ९२९ ९२१ ९३३ ९३३ ९३४ ९४१ ९४२ ९४६ ९५४ ९६१ ९६२ ९७४ ९६३ ९९४ ९६४ ९६५ ९६७ गुणस्थानोंमें नाम कर्मके सत्वस्थानोंकी योजना इकतालीस पदोंमें सत्व स्थानोंका कथन मूल प्रकृतियों में त्रिसंयोगो भंगोंका कथन उत्तर प्रकृतियोमें उक्त कथन गोत्र कर्मका बन्ध उदय सत्व गुणस्थानोंमें गोत्रके भंग गुणस्थानोमें गोत्रके भगका यन्त्र आयुके बन्ध उदय सत्वका कथन मायु बन्धके नियम नाना जीवोकी अपेक्षा आयु बन्धके भंग गुणस्थानोमे आयुके अपुनरक्त भग गुणस्थानोमे आयुबन्धके भेगोका जोड वेदनीय गोत्र ञायुके सब भगोका जोड वेदनोय गोत्र भायुके मूल भग मोहनीयके त्रिसयोगी भग गुणस्थानोमे मोहनीयके स्थानोकी संख्या वं स्थान कौन हैं, यह कथन मोहनीयके त्रि संयोगमें विक्लेप कथन बन्धस्थानमे उदय गौर सस्वस्थान उदयत्थानमे बन्य ओर सत्त्वस्थान सस्वस्थानमे बन्व भौर उदयस्यान मोहृनीयके बन्धाद तीनमे-सं दोको आधार ओर एकको आधेय बनाकर कथन बन्ध उदयमे सत्त्वका कथनं बन्ध सत्त्वम उदथका कथन उदष ओर सत्त्वम बन्धका कथन नाम कर्मके स्थानके त्रिरयोगी भंग नाम कर्मके स्थानोकं गुणस्यानोमे +, नाम कर्मके स्थानों के चोदह मार्गणामें ,, नाम कर्मके स्थानोंके इन्द्रिय मागणा में ,, नाम कर्मके स्थानोंके कायमार्गणामें ,, नाम कर्मके स्थानोंके योगमार्गणा में ,, कषाय भौर ज्ञान मार्गणामें न संयम मार्गणामें नं दर्शन लेइया मार्गणामें जा भव्य और सम्यक्त्व मार्गणामें नि बहार मार्गणामें 0 ११ ९६९ ९७१ ९.७४ ९७५ ९७९ ९८० ९८१ ९८३ ९८३ ९८५ ९८७ ९८९ ९८९ ९९० ९९० ९९१ ९९१ ९९४ ९२६ ९९७ १००० १००४ १००४ १०१२ १०१६ १०९३ १०३२ १०३१ १०३१ १०३४ १०३५ ' १०३८ १०४१ १०४३ १०४४ १०४७




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