गोरख बानी | Gorakh Bani

[adinserter block="2"]
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9.73 MB
कुल पष्ठ :
318
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)भूमिका | श्श
(व) (क) (छ) (ब) (ष. (न) (श्र) (कोर७१५, ,.. १७४३ रै७६४ १८५२ १८५५, .« १७१४
२०, जाती सॉरावली के से ध्
(छंद गोरख)
२१३. नवग्रह कू. के. के
२२. नवरात्र हु हा:
२३. भ्रष्ट पारछ था डे
र४. रद रास
१. ग्यान साला
र६. श्रात्साबोध (२)... के
९७. न्रेद ्छ् फ्
रम, निरंजन पुराण के
२६. गोरख चचन
३०, इंद्री देवता
३५, सूख गर्भावली
९, खाणी बायी
इ३, गोरख सतत क्र
रे४,. अष्ट सुद्ा
_ ईश,. चौबीस सिधि३९६. पढदघरी
इ७, पंच अन्न
देप, झम्टचक्र
३६, झबन्ि सिलुक के
३०५, काफिर बोध शकहिंदी के झन्यों की दस्तलिखित प्रतियां बहुत झाचीन नहीं मिलतीं । जो कुछ
सिन्नती हैं विक्रम की सन्नी अठारइवीं शती के दघर की दी हैं । रमते जोमियों
की बानी के प्राचीन इस्तसेस्सों का न मिलना भी कोई अरच्रल की बात सही ।
क्योंकि वे चेलों और श्रजुयायियों के जीम कान होती हुई भाई होंगी ! झाखिर
बानी दो उरी । ऊपर की साखी को देखने से पता चलेगा कि कोई भी दो
भ्रसियां आपस में सर्वधा मेल नहीं खातों । श्रुति-परपरा से होती झाती हुई इनमी की की छ
के कीं के छू
म्किकी की मी को म््प
User Reviews
No Reviews | Add Yours...