सामुद्रिक शास्त्र | Samudirk Shastra

Book Image : सामुद्रिक शास्त्र - Samudirk Shastra

एक विचार :

एक विचार :

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about ज्योतिषाचार्य भृगुराज - Jyotishacharya Bhraguraj

Add Infomation AboutJyotishacharya Bhraguraj

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
( ४६ ) _ गर तमाम उँ गलियाँ आगे की तरफ सुकी हुईं हों तो वह पुरुप चद्वल हृदय वाला होता है उसका हृदय किसी भी काय॑ मे सहीं लगता । यदि जड़ सीधी हो परन्तु वीच का भाग हथेली की ' तरफ झुका हो तो वह स्वरूप और हठीला होता दे । उसके हृदय में जो बात आती है उस पर जम भी नहीं पाता और जो कुछ वह सोच लेता है अगर उंसके विपरीत ही उससे कुछ कहां जाय ते हठ करने लगता अपने हठ पर ही दृढ़ रहकर अपनी ही बात पूरी से उसे विशेष आराम मिलता है । आगे की ओर भझुकी रहने. वाली उँ गलियों के स्वामी को: -- चब्वल हृदय वाला और हठीला सन्द चुद्धि और कम अक्ल । साहसहीने विकट कार्यो से मुँह छिपाने चाला । ' एकान्तं प्रिय और सरवदा खामोश रहने की इच्छा रखने वाला | अपने विचारों में उलभका रहने वाला | बताया जा सकता दे । परन्तु किसी नि्ेय पर पहुँचने से पहिले कु छ बातें और जान 'लेना जरूरी हैं । एक दम उ गलियों का झुकाव देखकर दी किसी विशेष लक्षण पर पहुँच जाना बुद्धि- मानी नहीं है । अगर तमाम उँ गलियाँ पीछे की तरफ झुकी ते वह चालक व्यौर गम्भीर होने का लक्षण है । जिसकी उँ गलियों का भुकाव पीछे की तरफ होगा उसका तात्पर्य होगा कि वदद चालक है । उँग- लियां जद परे तो सीधी और समान हों और चोटी की तरफ बढ़ती हुई उपर की तरफ से पीछे की तरफ झुक़ी हो सकती है । उनको देखकर नीचे लिखे फल कहे जा सकते हैं:-- चालाक और रद विचारक हो सकता हे ।




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now