ख़रगोश के सींग | Kharagosh Ke Seeng

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Kharagosh Ke Seeng by प्रभाकर माचवे - Prabhakar Machwe

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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- -फिर मेड़िये ने मेमने से कहा-- तूने नहीं तो तेरे बाप ने गाली दी होगी | ( इसप मेरे साथ एक बड़ी कमज़ोरी है । में गाली नहीं दे सकता । बचपन से ऐसे धामिंक और सुसंस्कृत संस्कार मन पर जमे हैं कि में एक बारगी एकदम गुस्से से भर कर मंगई पर नहीं उतर सकता और न एकदस श्रादिम भाषा में अपने क्रोध को व्यक्त कर सकता . हूँ । इसका मतलब यह समझा जाता है कि मैं दब्बूं हूं मैं कायर हूँ मैं मुँह तोड़ जवाब नहीं दे पाता--सुभ में क्रोध जैसे दमित- शमित हो गया है। संक्षेप में में सभ्य हो गया हूं। सम्यतां का एक क्षण यह माना गया है कि जो गाली न दे वह सभ्य मनुष्य है । मगर दुनिया ऐसी उलटी है कि जो जितनी ही बड़ी गाली जतने दी अधिक आवरण में छिपा कार चस्पां कर देता है वह रद




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