हिंदी एकांकी और एकांकीकर | Hindi Yakanki Aur Yakankikar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( दे ) इधर रेडियो पर प्र्तारण के लिये एकॉकियों की मांग बढ़ती गर्यी है । रेडियो के लिये ्रग्र जी ए.काकियों के किये गये । द्रम्रेजी के व्यापक प्रचार एवं शिक्षा के कारण जनता पाश्चात्य शंली के एकाकियों का पर्याप्त मान हुआ । श्री कामेश्वरनाथ भार्गव ने “विराप्स कैंरिडलस्टिक्स” का पुजारी ( १६३८ ) नाम से अनुवाद प्रस्तुत. किया | देराल्ड विश्रहाउस के 'दूप प्रिंस हू वाज़ पाइपर' तथा जे० जे० सन के एकाकी “'केम्पवेल श्राफ किल म्होर”” के अनुवाद प्रकाशित हुए । ए० मिलन की “दी मैंनइन ढठी दौडलर देर” का अनुवाद प्री० अमरनाथ गुप्त से किया; एच ब्रिगहाउस एवं ज० ए.० फगुसन के एकाकियां के स्वतन्त्र अनुवाद श्री प्रेमनारायण ट्रडन न भारतीय वातावरण के अनुकूल बनाकर किए, । श्रदतराय न रूसी लेखक कोस्ता- तिव सियोनोफ़के एकाको “रूसी लोग” ( हस १६४३ ) “चार चित्र” और “निशामबाज़” रूसी प्रस्युत किये | श्री वृन्दावनलाल वर्मा न वेली के एक एफकाकी का अनुवाद “प्रहसन प्रवेशिका”? के रूप में किया है । डाउन के “मेकर श्राफ़ ट्रीम्स”' का रेडियो रूपान्तर किया गया । जौन डिन्सवाटर के “ » -- ० ए. नाईट आआफ़ दी ट्रौजन वार” का अनुवाद श्री दुर्गादास भास्कर एम० ए०, एल0 एल बी०, “सरस्वती” में कलिंग युद्ध की एक रात” के नाम से प्रकारित किया था । श्री भारतीय * एम० ए० ने जापान क “नौ” नाटकों की श्रोर जनता का ध्यान श्राकृप्ट किया था : १--कुंछ झालाचकों के मत इस प्रकार हैं-- हिन्दी में श्राघुनिक एकाकी नाटक पश्चिम से श्रोया है। सस्कृत में पुरानी परिपाठी के नाटकों का उल्लेख उपलब्ध हैं; किन्ठ ये पुराने टाइप के काव्य प्रधान एकांकी हैं । हिन्दी का एफांकी संस्कृत रीति से नद्दीं, पाश्तात्य शैली से प्रभावित हुआ है ।” दृरदेव वाइरी, डी० लिद २--हिंन्दी साहित्य में एकाकी नाटक पाश्चात्य अनुकस्ण की देन हैं। -म्रो० चन्द्रकिशोर जैन, एम० ३--हिन्दी एकांकी 'पर पाश्चात्य एकांकी का प्रभाव पड़ा है.1 कद डी० एम० बोरगांवकर, एम० ए.0 पर




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