हिंदी - शब्दसागर अर्थात् हिंदी भाषा का एक बृहत् कोश भाग 2 | Hindi Shabdasagar Arthat Hindi Bhasha Ka Ek Brahat Kosh Bhag 2

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Hindi Shabdasagar Arthat Hindi Bhasha Ka Ek Brahat Kosh Bhag 2  by श्यामसुंदर दास - Shyam Sundar Das

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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चकचकाना ९श्७ सकना न निनिननिस्टनमयु-ीदविटसरसयमपस्यस्समनिसस मिक्स ससियदनल ए चकचकाना-क्रि० अ० देश० (१) पानी खून रस या श्र | चकताई-संज्ञा पुं० दे० चकत्ता | किसी द्रव पदार्थ का सूच्म करों के रूप में किसी चस्तु के | चदत-दंज्ञा पुं० दिं० चक्तता चकाठा । दति की पकड़ | भीतर से निकलना 1 रस रत कर ऊपर श्राना। उ०--जहाँ |... मुददा०--चकत मारना न दाँत से माँत आदि नेच लेना | बकाया जहाँ येत लगा है खून चकचका झाया है । (२१ भींग मारना दतिं से काट खाना | जाना | इ०--चक चकित चित्त चरवीन झुमि चकचकाइ | चकती-संशा ल्ली० सं० चनवत्‌ (9) किसी चददर के रूप की चंडी रदत ।--पश्माकर 1 चस्तु का छोटा गोल टुकड़ा । चमड़े कपड़े श्रादि में से काटा चकयकी-संज्ञा तर अनु० करताल नाम का वाजा 1 हुआ गोल वा चौाकार छाटा झुकड़ा । पट्टी । गोल वा साकार चकचाना्क्प-क्रि० देश० चैधियाना । चकाचांघ लगना घज्नी 1 उ०--इस पुराने कपड़े में से एक चकती निकाल ले उ०--तो पद चमक चकचाने चंद्रचूड़ चप चितवत एकटक (२) किसी कपड़े चमड़े बरतन इत्यादि के फरे वा फटे हुए जंक बैँघ गई है ।--चरण । स्थान पर दूसरे कपड़े चमड्टे वा धातु ( चदर ) इत्यादि का सयक्ाल-संज्ञा पुं० सं० चक++दिं० चाल चकर भ्रमण । टेका वा लगा हुआ टुकड़ा | किसी वस्तु के फरे फूटे स्थान दि कक है कद ७ # ० दर फेरा । उ०--माया मत चकचाल करि चंचल कीये जीव 1 को बंद करने वा सूँ दने के लिये लगी हुई पट्टी वा घज्नी । माया माते मद पिया दादू विसरा पीद 1--दादू। कि ग 1 अप न कि ० . कर पकचावक-संज्ञा पं० देश० चकार्चोघ । उ०--गोकुल के चप दर ग कि डर डी मुद्दा०--वादल में चकती लगाना अनहोनी वात करने का से चकचाव गो चोर ले चौकि झयान विसासी । नमन डी रे प्रयल्त करना । असंमव कार्य करने का श्ायानन करना कहूत कन्चून-वि० रूं चक्रन चूर्ण चूर किया हुआा । पिसा हुआ । बह नदी चात पहना | लैर ९ € कि 2 वध पडा ४ टू चकनाचूर । उ०--पान सुपारी लेर कहें मिले करे चकचून 1 कि यय कक कि दुचे भे डरे की गोल थार चौड़ी दम तब लगि रंग न राचे जब लगि हाय न चून 1--जायसी । (३) 5 किम दी हा कमर दायर शा चकत्ता-संज्ञा पुं० सं० चक्र+वत्त (१) शरीर के ऊपर बड़ा (घि-संज्ञा ख्रो० दे चकाचांघ |... . योल दाग । चमड़े पर पढ़ा हुशा घब्या वा दाग । ( रक्त- सक्लैघिना-कि० ० सिं० चफुपून अप] ध्ाखि का थत्यंत अधिक विकार के कारण चमड़े के ऊपर लाल नीले वा काले चकतते प्रकाश के सामने ठददर न सकना । श्रत्यंत्त प्रखर श्रकाश के पड़ जाते हैं 1 ) (२) खुजलाने श्रादि के कारण चमड्रे के सामने दृष्टि सिर न रहना । धाखि तिलमिलाना चका्ांध उपर थोड़े से घेरे के चीच पढ़ी हुई चिपटी श्र यरायर होना । सूजन जा उभड्टी हुई चकती की तर दियाई देती है किं० स० प्राखि में चमक उत्पन्न करना । ाखों में तिलमिला- ददोरा । (३) दर्तिं से काटने का चिद्ठ 1 दति झुभने का हट पेंदा करना । चकार्चाधी उत्पन्न करना । उ०--(क) श्रेघ निशान । घुषध शंवर ते गिरि पर माना परत चन्र के तीर । चमकि |. किट प्र०--डालना । चमकि चपला चकर्चाथति श्याम कहत मन धीर ।--खूर। |. मुद्दा०--चकत्ता भरना दि से काटना | दूत से मांस निकाल दनपपमरतप्यल पटरी (स) चकचांधति सी चितबे चित मैं चित सावत हूँ महँ लेना । चकफत्ता मारना दांतिं ने काना । जागत है ।--केशव । संज्ञा पुं० त॒० चगृताई (४) सेाग़रल वा तातार थमीर चग- सकर्वाधी-उंज्ञा खी० दे० चकार्वाघ | ताई खा जिसके चंश में चायर श्रकयर श्रादि भारतवर्ष के चकर्लादक-संज्ञा सी देश० चकार्चाघ । माग़ल बादशाह थे । उ०--मोटी भट्टे चंडी घिजु चारटी के सकचाहना+-क्रि० स० देश० चाह से देखना । श्राशा लगाए चाय सींस खाटी भई संपत्ति चफत्ता दो घराने की 1 टके चाँघि कर देखना । उ०--जनु चातक सुख चूँद सेवाती 1 सूपण 1 (२) चग़ताई चंदा का घुसुप । उ०--मिलतदि इस्त राजा चकचाहत तेड्ि भाती 1--जायसी । सकता को निरखि.कीना सरजा सुरेस उरें दुचित्त घजराम यकड़वा-संशा पुं० दे० चकरवा | के 1--मूपण । लकडेार-संक्ञा सरी० दिं० (१) चकई की ढोरी । चकई नामक | श्वकदार-संज्ञा पुं० दिं चक न फाड दार (व) यद जो दूसरे सिलौने में लपेटा हुश्ना सूत । ०--एक) सेलत श्रवघ सोरि की ज़मीन पर कुर्धा बनवावें श्रार इस ज़मीन का लगान दें गोली भैंवरा चकडोरि सूरति मधुर वी तुलसी के दिय रे । प्वकनाश-दि य० सिं० चर न मात (१9 चकित हवा । सीचपा -एएलसी। (स) दे मैया भैंवरा चकदोरी । जाइ लेहु ारे द्वोना 1 चरुपकाना विस्मित होना । उ०-एप्) चिस पर रास काल्हि माल ले रागे कोरी 1--सूर । (२) उलाहे चितेरी रष्री चफि सी जकि एफ वे है गई दा. चम्वीर सी रे फरवे में चह ठोरी जा चक या नचनी में लगी हुई नीचे 1--येनी प्रदीन । (गय) यदु्थसी घनि घनि सुर पु दरि की रीचि देग्यि घफि रदरी 1नारयुराम 1 (२) घना लटक्ती है श्ार जिसमें येसर वैधी रदती हैं ।




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