वायु पुराण भाग - 2 | Vayu Puran Part- Ii

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5.96 MB
कुल पष्ठ :
450
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
जन्म:-
20 सितंबर 1911, आँवल खेड़ा , आगरा, संयुक्त प्रांत, ब्रिटिश भारत (वर्तमान उत्तर प्रदेश, भारत)
मृत्यु :-
2 जून 1990 (आयु 78 वर्ष) , हरिद्वार, भारत
अन्य नाम :-
श्री राम मत, गुरुदेव, वेदमूर्ति, आचार्य, युग ऋषि, तपोनिष्ठ, गुरुजी
आचार्य श्रीराम शर्मा जी को अखिल विश्व गायत्री परिवार (AWGP) के संस्थापक और संरक्षक के रूप में जाना जाता है |
गृहनगर :- आंवल खेड़ा , आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत
पत्नी :- भगवती देवी शर्मा
श्रीराम शर्मा (20 सितंबर 1911– 2 जून 1990) एक समाज सुधारक, एक दार्शनिक, और "ऑल वर्ल्ड गायत्री परिवार" के संस्थापक थे, जिसका मुख्यालय शांतिकुंज, हरिद्वार, भारत में है। उन्हें गायत्री प
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)प्रजापति वश कौन] [ ९५
ग्राचीनयोगपुत्रश्न वुद्धिमाश्र पतज्नलि 1
कौबुमस्प तु भेदास्ते पाराशषर्यस्थ पट समता 1
लाजूलि नालिहोन्रश्न पद पट प्रोवाच सहिता 1/४२
पौप्यस््जी के चार शिष्प थे उनके नाम लोकाक्षी-कुवुमि-कुधीती गौर
लाज़ल थे । भव उनके भेद बललाये जाते है उन्हें प्राय लोग सम क लेजें ॥३६॥
तसरिष का पुथर चहू रासामनीय था । उससे भन्प मूलचारी था जो कि बहुत
श्रच्छा विद्वान था । सकठि पुर सहमसात्य पुन दे लोकाकी के भेद जानों ॥३७॥
कुथुि के सीन पुन जीरस-रसपारस श्रौर भाग वित्ति ये सीन प्रकार यालें तेज-
युक्त कौथुम कहे गये हैं ॥३८॥। शौरिदू-युद्धिपुम दो ये चरित ब्रेत वाले थे ।
राणापनीय श्रौर सौमिनि ये दो. दोनों सामवेव के पर्डित ये ॥॥३६॥। महादू
संपस्वी शुश्धिपुत्र ने तीन सदता कही थी । हे दिजोततमों | चैल, प्राचीन योग,
सुराल इनने है संहिता बोली थी, इनमें पाराशयं श्र कोथुम भी हैं।
'ासुरायण श्रौर वैश नाम वाले दोनों वेद वृद्ध मे परायण थे ॥४१॥। प्राचीन-
योग का पुध पतब्जलि बडा बुद्धिमान था । कोथुम के वे भेद पारायार्य के छे
कहे गये हैं। लाजूलि श्रोद शालिहोभ ने दै-उैं सहिता बतलाई हैं ॥४र॥1
भालुकि कामहानिश्व जैमिनिलॉमगायिन ।
कण्डश्ध कोलहशं व पढेते लाजला स्पृत्ता ।
एते लाज़ूलिन शिष्या सहिता वे प्रसाधिता ॥४३
ततो हिरण्यनाभस्य कृतशिष्यो नूपात्मज ।
सोध्करोच्च चतुविदवत्सहिता द्विपदा बर ।
भरोवाच चैव दिष्येस्यों ये म्यस्ताश्र निवोधत ।४४
राडश् महंवीर्यश्र प््चमों वाहनस्तथा ।
सालक पाष्डक्चय कालिकों राजिकस्तथा |
गौतमश्वाजवस्त॒श्व सोमराजापतसत ॥४५
पृष्टन परिकुष्टश्न उलूखलक एवं च 1
यवीयसश्च वेगालों मे गुलीयश्र कौशिक 11४६
सतलिमज्ञरिसत्यश्र कापीय कानिकश् य ।

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