ब्रज माधुरी सार | Braj Madhuri Sar

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutDr. Ramkumar Varma
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
15.96 MB
कुल पष्ठ :
376
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about डॉ रामकुमार वर्मा - Dr. Ramkumar Varma
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)श्रीव्रदास रहपद बन सकते हैं, इसमें सम्देद्द नहीं । कवि-सम्राट सूर के सश्दन्ध में
कई भावुक रसिक्जनों ने श्रपनी-श्पनी सम्सतियाँ प्रकट की हैं । कतिपब
सज्ोक-प्रचजित सम्मतियाँ ये हू
तत्व-तत्व सूरा कदी, तुलसी कद्दी अनूदठि |
चची -खुची कविरा की, श्र की सब भूठि 1]
उत्तम पद कवि गंग को, कथिता को बलवीर |
चेश् अथ रॉमीर को, सर तीन शुन धघीर ||
किधों सर को सर लग्यो, क्रिघों सूर की पीर |
किघों सूर को पद लग्यों तन मन घुनत सरीर |
सूरदास थिन पद रचना अत कौन कव्रिदि करि आये है
सूर-कवित सुनि कौन कवि जो स्टि सिर चालन करे !
खोज में सूएदास के निम्नलिखित अंथों का पत्ता चला है 5
१. सूर-साराचली; २८ सुर ागर (श्रपूर्ण); दे. साइित्य-खदरी (दृष्टि
सूटकेन्पदाच जी), ४० ब्याइलो; ० नजदमयंती; ६ हृरिवंरा टीका 1
इनमें से धंतिम तीन संथ श्रप्राप्य हैं श्रोर संदिग्ध भी हैं ।
संभव है ये पुस्तकें किसी श्रन्य सूगदास की लिखी दो । “सिर-
सारावली” शरीर 'साइिस्य-लहदरी,” 'सुरसारा(' से संकलित की गई हैं ।
सुत्तरामू , सूर-सागर ही सूरदाप का एकमात्र चूददू ग्रन्थ है । इस
अऋसाघ सागर में घ्रनेक ब्मूदय दिध्य रख भरे पढ़े हैं । नीचे कुछ पद
उद्धृत किये जांते हैं :
बविलाचत
चरनकमल चन्दीं हरि राई |
जाफी कृग पंगु शिरि लंघे, श्रंपे को सब्र कट दरसारे ॥
वद्िरों सुने, पूक पुनि बोलें, रंरू चले सिर छुतह घराई |
'सूगदास” स्वामी वायणामय, वारवार बन्दों तिदि पाई 1 १॥शराजा । ररगड़ा । कर जदय 1
चर
User Reviews
No Reviews | Add Yours...