तुलसी दर्शन | Tulsi - darshan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[ ४ ३ ६. हरिमक्तिपथ “वतिसम्मत हरिमक्तिपथ सयुत विरति विवेक” ही गोस्वामी जी का झभीष्ट मक्तिमार्ग है--“भक्ति” शब्द पर विचार--मक्ति का झततिव्यापक रूप, व्यापक रूप श्र प्रकृति रूप--गोस्वामी जी द्वारा कयित भक्ति की परिभाषा--उस परिभाषा का अयं--“हरि” शब्द पर विचार-- दरिनाम की विशेषताएं--“संयुत्त विरति विवेक” शब्द पर विचार-- विवेकदष्टि और वैराग्यदष्टि का मदृत्व--श्रद्धा ओर शझ्ावक्ति के साथ विवेक श्रौर वैराग्य का समन्वय--“श्रुतिसम्मत” शब्द पर विचार-- भारतीयों के लिये श्रुति का महत्व--“पथ” शब्द पर विचार--ज्ञानमाग और भक्तिमाग की तुलना--मक्तिपथ की महत्ता । पृष्ठ २३१-२७र२ ७. भक्ति के साधन भक्ति के साधन झसीम हैं--भागवत और अध्यात्म रामायण के अनुसार दो प्रकार कौ नवधा भक्तिपद्धति--गोस्वामी जी द्वारा कथित नवधा भक्ति, ससधा भक्ति, चतु्दशधा भक्ति, भक्तिमणि श्र भक्ति- संजीवनी--भक्ति की कृपासाध्यत्ता और क्रियासाध्यता--झपा श्र क्रिया का सामझस्य--अन्य झचिवायं साघन--प्रेंमासक्ति--नामजप-- सत्सज्ज--तीसरे प्रकार की नवधा भक्ति । पृष्ठ ९७३-३२५ ८. तुलसीमत की विशेषता ठुलसीमत--उसकी बिशेषता--( १) वद्द स्वयं बहुत उत्तम सिद्धान्त है--( तर) उसमें बुद्धिवाद और इदयवाद का सुन्दर सामझस्य हे--उसमें रत्तक है, अ्रद्वेतवाद है, पाप के मूल को विष्वंस करने की




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