नैपालका इतिहास | Nepal Ka Itihas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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इतिहास टलै४8-9 ११পাপী ~ ~~~उजाड दिवा 1 हरिसिंहदेव नेपाले भागा ओर नेपालको जीतकर गदीपर वेट. वाधमर्ताके किनारे वाहरवार गांव हैं जिसका जलवायु, अतिउत्तमहै। सन्‌ १८१४ শব हु এ पहिली भ শিईंसचीको नेपालकी पहिली लडाईमें मेजर त्राडरसने इस स्थानकों ही घेर कर जीताथा,शल्य सप्तारी जित वाघमतीसे कमलानदीतक वसा हुआहेी इस जिलेकी सीमाके- अन्तमें पुराने नगर जनकपुरका खंडहर दिखाई देताहे 1 मोहतारी जिला कमलासे कोसीनदी तक फेलाहुआह । कोसीके दक्षिण किनारे सीमाके पास भानुरानामक स्थानमें सेना रहतीहै, कोसीके पूरव मीची नदीतक तराईका नाम मोरननार । जिसकी भूमि इकसारहै, परन्तु कीचड जल वायु और रोगोंसे भरी हुईं है। तराइसरमें यह स्थान सबसे अधिक स्वास्थ्यका विगाडनेवालाहै, नदियाँका जल भी बहुत दूषित है, तथा सवी वस्तु विपैली है । मोरन्ञाको छोडकर तराईकी दूसरी भूमि साफ सुथरी और बहुत अन्न उत्पन्न करनेवाली है, ईख, अफीम ओर तमाखुमी इसमे भलीमां- तिसे होसक्ता हे । कोसीके पिले जंगलोंमें हाथियोंकी संख्या दिन २ कमती होती जातीहै ! मोरङ्नामे अव वहत हाथी पायेजातिदै, किन्तु पटिलेते वहां भी कम होगये हैँ ।नैपारु उपत्यका ।(9गोसाईं थान पर्वेतके अन्तर्गत লক पर्वैतके ठकि दक्षिणम सप्तगण्डकी ओर सप्तकोशिकीके ववि जो ऊंची उपत्यका है, उसदीका नाम नेपाल उपत्यका । यह उपत्यका त्रिकोणाकार है, लम्बाई पूर्व पश्चिसममें १० कोस ओर उत्तर दक्षिणमें चो- डाव ७॥ कोस है । प्रथिममें त्रिशल गद्गानदी हे, पूर्वमें मिलाचिया इन्द्राणी नदी है। उपत्यकाके चारों ओर परवत है, उनम उत्तरम धेवज्ञ पर्वतमालामे शिवपुरी, काकानि, पूर्वने महादेव पोखरा शिखर, देवचौक ( देवचोया ), पश्िममें चागाऊुन पवेत और दक्षिणमें शेषपाणि पर्वेतमालामें चन्द्रागरिे, चम्पादेवी और फूलचौका ( फूलचोया ) आदि पर्वत शिखरही ठीक सौमारुपसे स्थित हे । नेपाल उपत्यका समुद्रसे ४५०० फुट ऊंचे पर है। चारों ओर छोटे ३ पर्वत शिखर होनेके कारण चारों ओर ओर भी छोरी २ करई द्री ह । चद्यपि उनमें स्वभावसेही अन्तर पडा हुआ है, तथापि वे नैपाल उपत्यकामें गिनीजाती हैं। किनारेकी इन समस्त उपत्य- काओमेंसे दाक्षिण पश्चिममें चित्तालिंग उपत्यका ( वाघमतीकी उपनदी पानौनीसे ` ` धुलनेवाली ) है! पश्चिममें घूना और कालपू उपत्यक्रा ( त्रिझ्वलगंगाकी घूना और




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