विनय पिटक | Vinay Pitak

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutRahul Sankrityayan
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
22.8 MB
कुल पष्ठ :
615
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about राहुल सांकृत्यायन - Rahul Sankrityayan
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)९ 3 प्रस्तावको दृहराते हुये उसके विपक्षमें बोलनेके लिये तीन बार तक अवसर दिया जाता था जिसे अ न - श्रावण कहते थे और अन्तमें श्रा र॑ णा द्वारा सम्मतिके परिणामकों सुनाया जाता था । अन्य पुराने प्रंथोंकी साँति इस विनय-पिटकमें वर्णित विषयोंकी सुर्खी देनेंका र्याल बहुत हो कम रबखा गया है । वस्तुत यह ग्रंथ तो कंटस्थ करनेवालोंके लिये था और उनके लिये सुखियाँ उतनी आवश्यक न थीं । मेने सभी जगह अपेक्षित सुखियोंको भिन्न टाइपोंमें दे दिया है। अपने पहिछेके अनु- वादोंकी भाँति यहाँ भी अन्तमें विस्तृत परिशिष्ट दे दिया है । यदि पाठकोंकी सहायता प्राप्त होगी तो रह गई शुटियोंको दूसरे संस्करणमें ठीक कर दिया जायेगा । च्दया ) राहुल सांकृत्यायन ७-७-३४ ई०
User Reviews
No Reviews | Add Yours...